श्रीनगर। गढ़वाल विवि के पूर्व डीएसडब्ल्यू प्रो. जेपी पचौरी का कहना है कि हिमालयी राज्यों में बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं हों या ऑल वेदर रोड, इनके निर्माण में स्थानीय समुदाय से राय मशविरा किया जाना चाहिए। स्थानीय निवासियों के सहयोग के बिना उक्त परियोजनाएं सफल नहीं हो सकती। किसी भी परियोजना के निर्माण में जितनी भूमिका विशेषज्ञों की होती है, उससे अधिक उस परिवेश में रहने वाले ग्रामीणों के अनुभवों का महत्व होता है।
प्रो. पचौरी शुक्रवार को गढ़वाल विवि के समाजकार्य व समाजशास्त्र विभाग के सभागार में ‘हिमालयी राज्यों में बड़ी परियोजनाओं का निर्माण’ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने बताया कि पांच मार्च को प्रो. पचौरी की अध्यक्षता में पलायन और रोजगार को लेकर सचिवालय में बैठक बुलाई गई है, जिसमें विशेषज्ञों के साथ ही विभागीय सचिव भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में प्रो. जेपी पचौरी को समाजशास्त्र विभाग के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों ने सम्मानित किया। प्रो. पचौरी 40 वर्षों की सेवा के बाद 31 जनवरी को गढ़वाल विवि से सेवानिवृत्त हुए हैं। प्रो. पचौरी विवि में विभिन्न दायित्वों के साथ डीन स्कूल ऑफ सोशल साइंस के पद पर भी तैनात रहे। कार्यक्रम में प्रो. किरन डंगवाल, डा. जेपी भट्ट, डा. उमा बहुगुणा आदि मौजूद थे।