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विरोध के अनोखे तरीके से बदली स्कूल की सूरत

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अभिभावकों की मेहनत से बदली स्कूल की तस्वीर
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-- टपकती छत से परेशान होकर हेलमेट पहन स्कूल पहुंचें बच्चे
-- मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद जागी सरकार, जारी किया फंड

अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
सरकारी स्कूलों की तस्वीर किसी से छिपी नहीं है। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी छतें टूट चुकी हैं, और बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। ऐसा ही एक स्कूल था राजकीय इंटर कॉलेज दूधली। ग्रामीणों के प्रयासों से अब स्कूल की तस्वीर ऐसी बदली कि राजकीय इंटर कॉलेज दूधली आज पब्लिक स्कूलों के लिए चुनौती खड़ी करने लगा है। ऐसे ही आप अपने नजदीकी स्कूल की तस्वीर बदल सकते हैं। शुरुआत आप उस स्कूल से कर सकते हैं, जहां से आपने पढ़ाई की। एक दौर था जब डोईवाला विकासखंड के अंतर्गत आने वाली दूधली ग्राम सभा का राजकीय इंटर कॉलेज अपने जर्जर हालात पर आंसू बहा रहा था। विद्यालय में पेयजल और बालिकाओं के लिए शौचालय का अभाव, बारिश में छत से टपकता पानी विभागीय व्यवस्था को जता रहा था।
शिक्षा विभाग को नींद से जगाने के लिए लिए युवा समाजसेवी अजय कुमार, कमल थापा, ललित पंत और मुकेश कुमार आदि जागरूक लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुुक्त प्रयास किया। साल 2014 में शिक्षक दिवस के दिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को हेलमेट पहनाकर भेजा। मामला चर्चाओं में आया तो विद्यालय की जीर्णशीर्ण स्थिति विभाग के संज्ञान में आई। प्रारंभिक स्थिति में प्रभारी प्रधानाचार्य का स्थानांतरण पिथौरागढ़ कर दिया गया। हेलमेट पहनकर अभिभावक और बच्चों के आने पर कुछ लोगों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी हुई। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट ने भी स्कूल को ठीक करने के निर्देश दिए। दबाव में आई सरकार ने विद्यालय के कायाकल्प के लिए एक करोड़ 40 लाख की धनराशि जारी की। इसके बाद विद्यालय की तस्वीर ही बदल गई। अब राजकीय इंटर कॉलेज दूधली आज क्षेत्र के पब्लिक विद्यालयों को चुनौती दे रहा है। वर्तमान सत्र में सीबीएसई और दूसरे बोर्ड के तमाम छात्र-छात्राओं ने इस विद्यालय में दाखिला लिया है।
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दूधली इंटर कॉलेज आज सामूहिक प्रयासों से आदर्श स्थिति में आने लगा है। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने विद्यालय की बेहतरी के लिए जो प्रयास किए थे उसके बेहतर परिणाम सामने आए। विद्यालय में चाहरदीवारी, शौचालय, ग्रीन बोर्ड, बेंच स्टूल, लैब, कंप्यूटर और पुस्तकालय उपलब्ध हो गया है।
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- अजय कुमार, समाजसेवी, दूधली।

विद्यालय में पठन पाठन के लिए आज सभी जरूरी व्यवस्थाऐं मौजूद हो गई है। हाईस्कूल और इंटर दोनो का वार्षिक परीक्षाफल बढ़ गया है। संसाधन की उपलब्धता हो जाने से विद्यालय की छात्रसंख्या में बराबर बढ़ोत्तरी हो रही है।
- सुधांशु असवाल, प्रधानाचार्य, राईका , दूधली।
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