श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर में जूनियर और प्रशिक्षु डाक्टरों के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है। शनिवार दोपहर तक आंदोलित डाक्टरों ने वार्ता के बाद काम पर लौटने की बात कही, लेकिन देर शाम वह सैलरी के मुद्दे पर फिर अड़ गए।
इंटर्न को चार माह से मानदेय नहीं मिलने, जूनियर रेजीडेंट (जेआर) की वेतन विसंगति दूर नहीं होने और अवैध रूप से विद्युत उपकरण प्रयोग करने पर कालेज प्रशासन की ओर से मेडिकल कालेज के जूनियर रेजीडेंट और प्रशिक्षु डाक्टरों ने 24 जनवरी से ओपीडी (वाह्य कालीन रोगी विभाग) का बहिष्कार कर दिया था।
25 जनवरी की शाम उनकी प्राचार्य प्रो.सीएम रावत से वार्ता ह्रुई लेकिन बात नहीं बनी। 27 जनवरी को कालेज खुलने पर पुन. उनकी प्राचार्य प्रो. रावत और वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप से वार्ता हुई। वार्ता में सहमति बनने पर कालेज प्रशासन की ओर से आदेश भी निर्गत कर दिए गए।
लेकिन देर शाम डाक्टर पुन. कालेज पहुंच गए। उन्होंने फिर हल्द्वानी मेडिकल कालेज के समान जेआर को वेतन देने की मांग की। लेकिन वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप ने साफ मना कर दिया कि श्रीनगर मेडिकल कालेज के जेआर को शासनादेश के अनुरूप वेतन मिल रहा है। उनको ज्यादा वेतन नहीं दिया जा सकता है। जब वार्ता सफल नहीं हुई, तो जूनियर डाक्टर चले गए।