गोपेश्वर। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में पाक गोलाबारी में शहीद जगदीश पुरोहित का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार को उनके गांव गंडासू लाया गया। इस दौरान शहीद की मां और पत्नी बदहवास होकर गिर पड़ीं। शहीद का शुक्रवार सुबह सैनिक सम्मान के साथ नंदाकिनी और मोलागाड के संगम तट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
जम्मू कश्मीर के राजौरी में विगत 22 जनवरी को पाकिस्तान की ओर से भारतीय चौकियों पर अचानक हुई गोलाबारी में चमोली के गंडासू गांव के सैनिक जगदीश पुरोहित के सीने में गोली लग गई थी। उन्हें घायल अवस्था में राजौरी सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान 24 जनवरी को सुबह छह बजे जगदीश ने अंतिम सांस ली। बृहस्पतिवार को शहीद जगदीश का पार्थिव शरीर सेना के विमान से जौलीग्रांट लाया गया और वहां से हेलीकॉप्टर से शाम चार बजे गोपेश्वर स्पोर्ट्स स्टेडियम लाया गया। स्टेडियम सेना और जिला प्रशासन के अधिकारी शहीद के पार्थिव शरीर को वाहन से गंडासू गांव ले गए। इस दौरान स्टेडियम और आसपास के लोग शहीद की अंतिम झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। शहीद जगदीश का डेढ़ वर्ष का पुत्र वरुण और पांच साल की बेटी कामिनी है। पिता की शहादत की खबर आने के बाद से ही नन्हीं कामिनी का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दौरान पूर्व डिप्टी स्पीकर डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी, नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत, डीएम आशीष जोशी, एसडीएम परमानंद राम भी मौजूद थे।
‘शहीद जगदीश अमर रहे’ के नारे गूंजे
गोपेश्वर। खेल स्टेडियम में जैसे ही शहीद जगदीश के पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर से सेना के वाहन में रखा गया, इस दौरान वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। लोगों के ‘भारत जिंदाबाद’, ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ और ‘शहीद जगदीश अमर रहे’ के नारों से गोपेश्वर नगर गूंज उठा।
जवानों की शहादत का बदला ले भारत : गोविंद
गोपेश्वर। पाकिस्तान की ओर से लंबे समय से सीमा पर सीज फायर का उल्लंघन किया जा रहा है। अब पाकिस्तान को करारा जवाब देने का वक्त आ गया है। भारत सरकार को जवानों की शहादत का बदला लेना चाहिए। आखिर, कब तक मां, बहिनें और पत्नियां जवानों की शहादत पर आंसू बहाती रहेंगी।
यह शब्द हैं शहीद जगदीश पुरोहित के पिता गोविंद राम पुरोहित के। वे मुठभेड़ के दौरान जगदीश के घायल होने की सूचना मिलने पर राजौरी के सेना अस्पताल पहुंच गए थे। सेना से ही सेवानिवृत्त गोविंद राम पुरोहित ने कहा कि यदि अब भी पाकिस्तान बाज नहीं आता है तो भारत को वर्ष 1971 का युद्ध दोहराना ही होगा। वह भी 1971 की लड़ाई का हिस्सा रहे। तब जंग में भारतीय जवानों ने पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कड़ा फैसला लेकर देश की ताकत पाकिस्तान को बताई थी। ब्यूरो