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विशेषज्ञ नहीं, अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं पंचकर्म के उपकरण

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कर्णप्रयाग। चमोली जिले में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ न होने से पंचकर्म चिकित्सा परवान नहीं चढ़ पा रही है। स्थिति यह है कि बिना किसी दुष्प्रभाव के कई बीमारियों को ठीक करने वाली इस पद्धति के उपकरण अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं, जिसके चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग के तहत जिला मुख्यालय सहित कर्णप्रयाग ब्लाक के चमोला, लंगासू और आदिबदरी में पंचकर्म चिकित्सा पद्धति शुरू करने का प्रयास करीब एक दशक पहले किया गया था। इस पद्धति से विभिन्न बीमारियों का उपचार करने के लिए अस्पतालों में उपकरण भी लगाए गए, लेकिन यहां विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हो पाई। अब यहां पंचकर्म चिकित्सा के उपकरण अस्पतालों में धूल फांक रहे हैं। लंगासू के व्यापार संघ अध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी का कहना है कि पंचकर्म से कई बीमारियां बिना किसी साइड इफेक्ट के दूर हो जाती हैं। अगर यह सुविधा शुरू होती तो लोगों को इसका लाभ मिलता। दूसरी ओर जिले के आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. डीएस पाल का कहना है कि अभी केवल जिला मुख्यालय पर ही इस पद्धति से लोगों का उपचार किया जा रहा है। पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के अस्पतालों में विशेषज्ञ तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।
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इन बीमारियों का होता है उपचार
पंचकर्म चिकित्सा पद्धति से मसाज के माध्यम से वमन, अतिसार, वात रोग, जोड़ों का दर्द, शुगर आदि रोगों का उपचार किया जाता है। साथ ही शरीर का शोधन कर रोग मुक्त बनाए जाने की प्रक्रिया पंचकर्म चिकित्सा पद्धति में है।
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