ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
राजस्व उपनिरीक्षक को आवंटित भूखंड के बजाय दूसरी जगह कब्जा दिलाना भारी पड़ सकता है। मामले में राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह चौहान ने तहसीलदार विकासनगर से राजस्व उपनिरीक्षक का स्पष्टीकरण तलब कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही अनाधिकृत कब्जे को हटाने के लिए प्रावधान के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
अस्पताल रोड निवासी आशीष कुमार पिपानिया ने तहसील विकासनगर से अप्रैल 2014 से अब तक ग्राम पंचायत नवाबगढ़, ग्राम भीमावाला में आवंटित भूमि की सूचना मांगी थी। विभागीय अपीलीय अधिकारी/राजस्व निरीक्षक इंद्रदेव द्वारा न तो उन्हें सुना गया और न ही समस्या के निस्तारण की कार्रवाई की गई। अपीलीय अधिकारी ने अस्वस्थ रहने का हवाला दिया। जिसे दरकिनार करते हुए आयोग ने विभागीय अपीलीय अधिकारी को इस तरह की पुनरावृत्ति न करने की ताकीद की।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि किसी पुराने आवंटी को जिस भूखंड में भूमि आवंटित हुई थी। उसे तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक एनफील्ड ने वहां कब्जा न दिलाकर अन्यत्र कब्जा दिलाया। तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक का तर्क था कि दूसरे भूखंड पर आवंटी को मानवता के नाते कब्जा दिलाया। जहां भूमि आवंटित हुई वहां अनाधिकृत कब्जा कर किसी दूसरे व्यक्ति ने भवन निर्माण कर दिया था। जिसे आयोग ने गंभीरता से लेते हुए कहा कि अनाधिकृत कब्जे के कारण यदि कब्जा दिलाया जाना संभव नहीं था तो राजस्व उपनिरीक्षक को दूसरे भूखंड पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई नहीं करनी थी। पूरी वस्तु स्थिति से तहसीलदार और एसडीएम को अवगत करा कर उनसे निर्देश प्राप्त कर अग्रिम कार्रवाई करनी चाहिए थी।