भुगतान न होने पर अटका 40 करोड़ की सड़कों का काम
-- निर्माण एजेंसियों का 23 करोड़ रुपये का चल रहा है बकाया
-- पैसे न मिलने से एजेंसियों ने रोके सड़कों के निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेेश। ऋषिकेश और समीपवर्ती क्षेत्रों में राज्य सरकार ने सड़कों के निर्माण को स्वीकृति तो दी है, लेकिन भुगतान की बारी आने पर सरकार कन्नी काट गई। बकाया भुगतान नहीं होने से क्षेत्र में करीब 40 करोड़ रुपये की सड़कों के काम अटक गए हैं। लिहाजा आधी अधूरी सड़क योजनाओं से नागरिकों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, राज्य सरकार ने करीब 40 करोड़ रुपये की तीन बड़ी सड़क योजनाओं को मंजूरी दी थी।
पीडब्ल्यूडी की ऋषिकेश अस्थायी डिवीजन ने टेंडर कॉल कर सड़कों का निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया, लेकिन निर्माण एजेंसियों को पेमेंट नहीं हो पा रही है। लिहाजा सड़कों का काम अधूरा है, जिससे संबंधित क्षेत्र के लोग और राहगीर परेशान हैं। लोनिवि के अस्थायी खंड ऋषिकेश निर्माण एजेंसियों के बढ़ते कर्ज से परेशान हैं। अधिशासी अभियंता बलराम मिश्रा के अनुसार करीब दो दर्जन सड़कों का काम भी आर्थिक तंगी की वजह से रुका हुआ है। बताया कि डिवीजन पर निर्माण एजेंसियों का करीब 23 करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है।
अधूरी सड़कें और भुगतान की स्थिति
केस-1 राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में ऋषिकेश-देहरादून मार्ग पर डांडी से भानियावाला तक करीब 9 किलोमीटर सड़क को टू-लेन से फोर-लेन करने के करीब 37 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी। लोनिवि के मुताबिक सड़क का 75 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। जिसकी एवज में अभी 18 करोड़ रुपये का भुगतान ही निर्माण एजेंसी को किया गया है। बकाया भुगतान नहीं होने से फोर-लेन सड़क का निर्माण डंप पड़ा है।
केस-2 एयरपोर्ट टर्मिनल रोड के नवनिर्माण के लिए एक किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए ढाई करोड़ रुपये के प्रस्ताव को 2015 में मंजूरी मिली, मगर अभी तक भुगतान महज 12 लाख रुपये का ही हो पाया है। लिहाजा इस सड़क का निर्माण भी लेटलतीफी से अटका हुआ है।
केस-3 मंशादेवी में करीब 6 किलोमीटर सीसी व पीसी सड़कों के दो करोड़ 90 लाख रुपये के प्रस्ताव को सरकार ने बीते वर्ष मंजूर किए। वर्तमान में सड़कों का करीब डेढ़ करोड़ रुपये का काम हो चुका है। बावजूद इसके भुगतान एक रुपये का भी नहीं हो पाया है। ऐसे में इस सड़क निर्माण कार्य भी आधा-अधूरा ही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
निर्माण एजेंसी के बकाया भुगतान के लिए मुख्यालय को लगातार पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाता है, लेकिन अभी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं होती दिख रही है। डिवीजन पर निर्माण एजेंसियों का करीब 23 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
बलराम मिश्रा, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, ऋषिकेश डिवीजन