घाट (चमोली)। छह माह तक ननिहाल में प्रवास करने के बाद बधाण की मां नंदा बृहस्पतिवार को अपने सिद्धपीठ कुरूड़ में विराजमान हो गई हैं। मां नंदा से मिलने के लिए मंदिर में सुबह से ही भक्तों का हुजूम उमड़ा रहा। मां नंदा ने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। ध्याणियों और क्षेत्र की महिलाओं ने मांगल गीतों से देवी से विदा ली।
बृहस्पतिवार को सुबह दस बजे से सैंती गांव के लक्ष्मीनारायण मंदिर में मां नंदा की विशेष पूजा शुरू हुई। पुजारी मंशाराम गौड़, विजय प्रसाद, योगेश्वर, कन्हैया प्रसाद, धनीराम, मनोहर प्रसाद, देवी प्रसाद, खीमानंद, पुरुषोत्तम, हरि प्रसाद और गिरीश चंद्र ने मां नंदा का शृंगार किया और पंच पूजाएं संपन्न की। इसके बाद मां नंदा की डोली ने सिद्धपीठ कुरुड़ के लिए प्रस्थान किया। विभिन्न गांवों का भ्रमण करने के बाद दोपहर दो बजे मां की डोली कुरुड़ मंदिर में पहुंची। यहां भक्तों ने मां नंदा का फूल-मालाओं से स्वागत किया। इसके बाद मां नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ में विराजमान हो गईं। भक्तों ने बताया कि अगस्त माह में विभिन्न पड़ावों से होते हुए मां नंदा की लोकजात शुरू हुई थी। 28 अगस्त को नंदा सप्तमी की पूजा-अर्चना के बाद दशोली की मां नंदा अपने सिद्धपीठ कुरूड़ आ गई थीं जबकि बधाण की मां नंदा छह माह के प्रवास के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा चली गई थीं। इस दौरान क्षेत्र पंचायत संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, कमलेश गौड़, देवेंद्र सिंह, कुलानंद, पार्वती देवी, शांता, कमला देवी, बिंदी देवी, योगेश्वर, सत्यप्रसाद, महावीर सिंह, दीपक गौड़ आदि मौजूद थे।