हरिद्वार। पिछले कई दिनों से पड़ रहे कड़ाके की ठंड का असर गंगा घाटों और बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। सुबह और शाम के समय गंगा घाट और बाजार वीरान नजर आ रहे हैं। बाहरी प्रदेशों से बहुत कम श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच रहे हैं और स्थानीय लोग भी कम ही बाहर निकल पा रहे। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ रहा है। कारोबार कम होने से धर्मनगरी के व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में दिनभर खाली बैठकर टाइम पास कर रहे हैं।
पूरे उत्तर भारत के साथ हरिद्वार और आसपास का इलाका शीतलहर की चपेट में है। कई दिनों से आधी रात के बाद कोहरा छाने लगता है। सुबह के समय सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो रहे। आधे दिन तक आसमान में कोहरा छाया रहता है। कोहरा छंटता है तो पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा परेशान कर रहे हैं। सुबह से शाम तक जबरदस्त शीतलहर चल रही है। दिन के समय कुछ देर के लिए धूप निकलती भी है तो वह बेअसर साबित हो रही है। ऐसे में लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। बाहर से आने वाले यात्रियों की संख्या भी ना के बराबर है। हरिद्वार के आश्रम, मठ और धर्मशालाएं खाली हैं। यही कारण है कि गंगा के घाटों पर पहले की तरह श्रद्धालु नजर नहीं आ रहे। सुबह और शाम के समय तो पूरी तरह से वीरानगी छाई रहती है। शाम के समय होने वाली गंगा आरती में काफी कम श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। दिन के समय ही हरकी पैड़ी और दूसरे घाटों पर कुछ लोग नजर आते हैं। शाम के समय ठंडी हवाएं चलने से यहां खड़ा होना मुश्किल हो रहा है।
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गरीबों के कंबल कब बंटेंगे साहब
कड़ाके की ठंड पड़ने पर हर साल जिला प्रशासन की ओर खुले आसमान के नीचे, रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डे पर रात गुजारने वाले गरीबों को कंबल बांटे जाते रहे हैं। इस साल ठंड का आधा सीजन पूरा होने को हैं और प्रशासन ने कंबल नहीं बांटे। ऐसे में गरीब लोग ठिठुरते हुए रातें काटने को मजबूर हैं।
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गंगा घाटों पर नहीं जल रहे अलाव
गंगा घाटों पर इस बार अलाव जलाने की व्यवस्था नगर निगम नहीं कर पाया है। सुभाषघाट पर सेवा समिति कई दिनों से अपने कार्यालय के सामने एक अलाव जलाने की व्यवस्था की है। नाईघाट, मालवीय द्वीप, घंटाघर, संजय पुल के पास अलाव न सुबह जलाया जा रहा है और न ही रात को। ऐसे में सुबह के समय स्नान करने और शाम के समय गंगा आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विष्णुघाट, रामघाट, गऊघाट बाजारों में दुकानदार अपनी ही व्यवस्था से अलाव जला रहे हैं।
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रैन बसेरे बेसहारा
नगर निगम की ओर से रोडी बेलवाला के दोनों रैन बसेरों के बाहर शाम को नियमित रूप से शाम को अलाव जलाया जा रहा है, किंतु रैन बसेरों को देखने व चलाने की जिम्मेदारी उसकी ओर से अभी तक किसी को नहीं दी गई है। ऐसे में आसपास के ठेली और फड़ लगाने वाले रैन बसेरों का प्रयोग अपना सामान रखने के लिए कर रहे हैं। कई ठेली वाले भी यहां रातें गुजार रहे हैं।