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सुमाड़ी में मनाया पंथ्या दादा का बलिदान दिवस

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श्रीनगर। राजा की तानाशाही के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति देने वाले पंथ्या दादा का बलिदान दिवस सुमाड़ी में मनाया गया। इस दौरान उनके त्याग को याद किया गया।
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पंथ्या दादा कटलस्यूं पट्टी के सुमाड़ी गांव के रहने वाले थे। 17 वीं शताब्दी में राजा मेदनशाह ने सुमाड़ी गांव में कर थोप दिया। जब जनता ने विरोध किया, तो राजा ने प्रतिदिन एक मानव बलि का हुक्म दिया। जिस परिवार की पहले दिन बारी आई, वह पंथ्या दादा के बड़े भाई का परिवार था। इस परिवार में पति-पत्नी और एक अबोध बालक था। जिस दौरान यह घटना घटी, उस समय पंथ्या अपनी बहन के घर फरासू में थे। उनके सपने में गौरा देवी ने सुमाड़ी की व्यथा बताई और पंथ्या रात में ही फरासू से चल दिए। सुमाड़ी पहुंच कर उन्होंने अपने प्राणों की बलि देने की बात कही और देवी को प्रणाम कर अग्निकुंड में कूद गए। यह हृदयविदारक घटना देखकर उनकी चाची भद्रा देवी और बहुगुणा परिवार की एक लड़की कीर्ति भी अग्निकुंड में कूद गई। इस तरह अत्याचारी राजा के खिलाफ सुमाड़ी में चिंगारी उठी। रविवार को पंथ्या दादा के बलिदान दिवस पर प्राणों की आहुति देने वालों को याद किया गया। इस अवसर पर दिनेश रूडोला और फतेहराम ने घडेल्या (वाद्य यंत्रों के साथ आह्वान) लगाया, जिसमें विमल चंद्र काला में पंथ्या दादा, पदमा देवी में भद्रा चाची, सुमित्रा देवी में कीर्ति और सतेश्वरी देवी में गौरा देवी अवतरित हुए। इसके बाद गांव के समीप पितरोड़ीधार में पितृ पूजा हुई। इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के ओएसडी नेत्रमणी मलासी, मुकेश काला, रतीश चंद्र काला, इंद्र मोहन काला, राकेश घिल्डियाल, दिनेश काला, ब्रज मोहन चौहान सहित मंगल दलों के सदस्य मौजूद थे।
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