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उतराखंड की परंपरा एवं गौरवशाली संस्कृति है भिटौली

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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हिल्स डेवलपमेंट मिशन की ओर से रविवार को प्रेस क्लब में लोक पर्व भिटौली धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में लोक गायक सौरभ मैठाणी एवं साथी कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये उत्तराखंड की लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।
भिटौली पर्व पर हर वर्ष चैत मास में मायके से विवाहिता को भेंट स्वरूप उपहार देने की परंपरा है। भिटौली परंपरा के तहत मायके वाले भाई, माता-पिता या अन्य परिजन चैत के महीने में उसके ससुराल जाकर विवाहिता से मुलाकात करते हैं। इस अवसर पर वह अपनी लड़की के लिए घर में बने व्यंजन जैसे खजूर, आटे, दूध, घी, चीनी का मिश्रण, खीर, मिठाई, फ ल एवं वस्त्र आदि लेकर जाते हैं। यह भेंट विवाहिता के पूरे गांव में बांटी जाती है। शादी के बाद की पहली भिटौली वैशाख में दी जाती है और इसके बाद हर वर्ष चैत मास में दी जाती है।
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प्रेस क्लब में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट ने कहा कि वर्तमान में दूरसंचार के माध्यमों और परिवहन के क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं की बदौलत दूरियां काफ ी सिमट चुकी हैं, लेकिन एक विवाहिता के दिल में मायके के प्रति संवेदनाएं और भावनाएं शायद ही कभी बदल पाएंगी। इसीलिए सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी कायम है। सामाजिक चिंतक पीसी थपलियाल ने कहा कि लोक परंपराओं के प्रदेश उत्तराखंड में कई ऐसे त्यौहार हैं, जो मैदानी इलाकों में नहीं मनाए जाते, भिटौली भी उनमें से एक है । कई लोग इसे भिटोई भी कहते हैं। भिटौली जिसका अर्थ होता है भेंट यानी मुलाकात करना। कार्यक्रम के दौरान हास्य कलाकार किसना बगोट ने चुटकुले सुनाकर लोगों को गुदगुदाया। कार्यक्रम में संस्था के कमल रजवार, प्रकाश मैठाणी, अनिल रावत, मोहन भुलानी, नैनीडांडा विकास समिति के अध्यक्ष सतीश घिल्डियाल, रूपेंद्र रावत, रेवा चौहान, विक्रम बिष्ट, गोपाल गुसांई, नरेंद्र रावत आदि उपस्थित रहे।
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