अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दिगंबर मुनि 108 श्री ज्ञानसागर महाराज का शुक्रवार को पतंजलि योगपीठ पहुंचे। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज से मुलाकात कर उन्होंने राष्ट्र के युवाओं के उत्थान सहित राष्ट्र निर्माण के विविध संदर्भों में विचार विमर्श किया। जैन मुनि की ओर से आचार्य बालकृष्ण महाराज को जैन साधना परंपरा से जुड़ी विशेष पगड़ी और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
जैन संत ने इस दौरान पतंजलि योगपीठ के पतंजलि रिसर्च सेंटर, भारत स्वाभिमान परिसर, पतंजलि बागवानी सहित अन्य प्रकल्पों का भ्रमण किया। उन्होंने आचार्यकुलम, पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि आयुर्वेद कालेज, पतंजलि गोशाला और ग्रामोद्योग, पतंजलि कृषि अनुसंधान केंद्र आदि की गतिविधियों की कार्यप्रणाली के बारे में समझा।
ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि आयुर्वेद व्यक्ति की दिनचर्या साधने में सहायक है तथा जीवन में अहिंसात्मक प्रवृत्ति का जागरण करता है, जबकि योगाभ्यास व्यक्ति के शरीर, मन और भावनाओं को साधता है। जैनमुनि ने बताया कि जीवन को अहिंसात्मक बनाने और ब्रह्मचर्य को साधने में दो पक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुनि ने कहा कि पतंजलि अपने योग-आयुर्वेद अभियान के माध्यम से देश में अहिंसा और ब्रह्मचर्य की शक्ति भर रहा है।
आचार्य बालकृष्ण ने जैनमुनि का स्वागत करते हुए कहा कि पतंजलि के प्रत्येक कार्यक्रम में देश के संतों और ऋषियों की प्रेरणाएं समाहित हैं। कहा कि स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक परंपराओं, राष्ट्रीय मूल्यों को स्थापित करने का ही ताना बाना बुना है। योग, आयुर्वेद, स्वदेशी, शिक्षा, अनुसंधान इसी संकल्पना से उपजे प्रयोग हैं।