अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
देह व्यापार कराने के लिए बालिका का अपहरण करने वाले दंपति समेत पांच लोगों को चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश वरुण कुमार ने दस-दस वर्ष की कैद और पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई है।
शासकीय अधिवक्ता नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि झबरेड़ा थाने में 17 जून 2012 को एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी 11 साल की बेटी घर से गायब हो गई थी। पुलिस ने बालिका को तरनतारन पंजाब से बरामद किया था।
पीड़िता ने अपने बयानों में बताया था कि वह घटना वाले दिन आरोपी नरेश की दुकान पर गई थी। वहां पर उसे टीना राकेश और सेठपाल भी मिले। चारों ने मिलकर उसे कोल्ड ड्रिंक पिलाया था। उसके बाद उसे चक्कर आने लगे थे तो यह लोग उसे डॉक्टर के पास ले जाने की बात कहकर गाड़ी में डालकर एक कमरे में ले गए थे। जहां पर एक पांचवां आदमी भी था जिसका नाम जनेश्वर बताया गया था। इन लोगों ने उसके कपड़े उतारने की कोशिश की लेकिन शोर मचाने पर दो व्यक्तियों के आने पर ये लोग उसे छोड़ कर भाग गए। उसके बाद कमरे से निकल कर वह लक्सर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी। घर का पता न होने के कारण उसे एक महिला ट्रेन में बिठाकर पंजाब ले गई थी। वहां पर उसने अपनी लड़की के पास छोड़ दिया था। जिसने उसे अपनी लड़की समझकर रख लिया। आरोपियों की डर की वजह से वह अपने घर पर वापस नहीं आई थी और महिला को कुछ नही बताया था। अपने बयानों में पीड़िता ने यह भी बताया था कि वे लोग उसे बेचना चाहते थे इसलिए अपने साथ ले गए।
दूसरे शासकीय अधिवक्ता राजकुमार ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर पांच गवाहों के बयान कराए गए दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने सेठपाल पुत्र तेलूराम और उसकी पत्नी टीना, जनेश्वर पुत्र छोटे राम, नरेश पुत्र हुकम सिंह, राकेश पुत्र तेलूराम समस्त निवासीगण ग्राम कोटवाल आलमपुर झबरेड़ा हरिद्वार को दोषी पाते हुए दस-दस वर्ष के कठोर कारावास और पंद्रह-प्रदंगह हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।