अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा रक्षा के लिए आंदोलित मातृ सदन संस्था को लेकर दिए गए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के बयान पर मातृ सदन ने कड़ा रुख अपनाया है। मातृ सदन के संत ब्रह्मचारी दयानंद ने परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि को कानूनी नोटिस भेजा है।
कानूनी नोटिस में चेताया गया कि या तो वे अपने बयान का खंडन कर लें या फिर माफी मांगे। ऐसा नहीं करने पर कानूनी लड़ाई के लिए तैयार रहें। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने मातृ सदन संस्था के संतों की तपस्या को लेकर बयानबाजी की थी।
अध्यक्ष ने बयान दिया था कि धर्म की आड़ लेकर लेकर संत समाज को बदनाम किया जा रहा है। खनन की आड़ लेकर गंगा को प्रदूषण से मुक्त कराने के नाम पर राजनीति चमका रहे हैं। ऐसे लोगों का धर्म से कोई लेना देना नहीं है और धर्म की आड़ लेकर आमजन के रोजगार छीनने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। परिषद के अध्यक्ष के बयान पर मातृ सदन की भृकुटी तन गई थीं। संस्था के संत ब्रह्मचारी दयानंद ने अपने अधिवक्ता अरुण भदौरिया द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया कि अध्यक्ष ने गंगा रक्षा के प्राण त्याग देने वाले संस्था के संत ब्रह्मलीन निगमानंद, संस्था के संतों एवं संस्था का अपमान करने जैसा कार्य जानबूझकर किया है। कहा कि नोटिस मिलने के सात दिन के अंदर अगर बयान का खंडन या माफी नहीं मांगते है तब वह कानूनी लड़ने से पीछे नहीं हटने वाले है।
अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने बताया कि भविष्य में इस तरह के बयान की पुनरावृति न होने की बात लिखित में देनी होगी वरना सिविल एवं फौजदारी वाद दायर कर दिया जाएगा।