गोपेश्वर। द्यौखारी महोत्सव के तीसरे दिन लोक कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। संयुक्त रामलीला मंच गोपेश्वर के कलाकारों ने जरासंध वध का मंचन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं अक्षत नाट्य संस्था के कलाकारों ने पांडव लीला का भव्य मंचन किया।
शनिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत उपाध्यक्ष लखपत बुटोला ने किया। उन्होंने अधिकाधिक ग्रामीणों से मेले का लाभ उठाने का आह्वान किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबसे पहले संयुक्त रामलीला मंच गोपेश्वर के कलाकारों ने जरासंध वध का मंचन किया। मंचन में जब भीम ने जरासंध के शरीर के दो टुकड़े किए तो यह दृश्य देख दर्शक भाव विभोर हो गए। इसके बाद अक्षत नाट्य संस्था के कलाकारों ने पांडव लीला का मंचन किया। ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव के पश्वाओं ने अपने अस्त्र-शस्त्रों के साथ नृत्य किया। कलाकारों ने पांडव लीला के जागरों की शानदार प्रस्तुति दी।
गोपीनाथ कला मंच ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत आयोजित नाटक में भ्रूण हत्या को रोकने के लिए आम लोगों को आगे आने और बेटियों के संरक्षण का संदेश दिया। जिला युवा कल्याण विभाग की ओर से मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने वाले घिंघराण क्षेत्र के महिला मंगल दल और युवक मंगल दलों को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत, मेला समिति के अध्यक्ष धीरज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य भागीरथी कुंजवाल, ग्राम प्रधान हरेंद्र राणा, कांग्रेस नगर अध्यक्ष अरविंद नेगी, सुरेश डिमरी, पपेंद्र सिंह और शैलेंद्र सिंह आदि मौजूद थे। मंच का संचालन मेला संयोजक हरेंद्र सिंह राणा ने किया।
यह है जरासंध वध की कहानी
आदिकाल में जब पृथ्वीलोक पर जरासंध नाम के राक्षस का आतंक फैला था। तब भगवान कृष्ण ने जरासंध को युद्ध के लिए ललकारा था। तब जरासंध भगवान कृष्ण के बजाय बाहुबली भीम के साथ मल्लयुद्ध करने के लिए तैैयार हुआ। जरासंध को वरदान था कि उसके शरीर से जो भी भाग कट जाता है, वह शीघ्र दोबारा जुड़ जाता है। युद्ध में जब भीम थक जाता है, तब भगवान कृष्ण इशारे से भीम को जरासंध वध की युक्ति बताते हैं। भीम युद्ध के दौरान जरासंध की दोनों टांगों को चीरकर विपरीत दिशाओं में फेंक देते हैं और लोगों को जरासंध के आतंक से निजात दिलाते हैं।