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अपराधी रहे हावी, पुलिस बेबस, हताश पब्लिक

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हरिद्वार। गुजर रहे साल 2017 में अपराधियों ने हरिद्वार पुलिस की नींद उड़ाए रखी। शहर में कभी कत्ल तो कभी टप्पेबाजी की बड़ी घटना से पुलिस बेहद परेशान रही। साल के अंतिम दौर में तिहरे हत्याकांड की साजिश भले ही नाकाम हुई पर अपराधियों के बुलंद हौसले की झलक साफ साफ दिखाई दी।
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वर्ष 2017 पुलिस के लिए अच्छा नहीं रहा। विधानसभा चुनाव परिणाम से ठीक पहले निर्मला छावनी में रहने वाले कंबल व्यवसायी अमित दीक्षित उर्फ गोल्डी के कत्ल ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। कत्ल का खुलासा हुआ, सामने आया गोल्डी की जान यूं ही चली गई। शहर आज भी गोल्डी के कत्ल से स्तब्ध है। वारदात को बेहद ही दुस्साहसिक ढंग से अंजाम दिया गया। आईसीआईसीआई बैंक शाखा से 40 लाख की रकम ले उड़े दक्षिण भारत के टप्पेबाज हत्थे चढ़े पर रकम की एक फूटी कौड़ी भी बरामद नहीं हुई। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के महंत मोहनदास की गुमशुदगी बड़ा मुद्दा बनी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की पुलिस ने ताकत झोंकी थी पर मोहनदास अब भी पहेली ही बने हैं। कनखल की शांतिपुरम कालोनी में हुई रिटायर्ड रेलकर्मी श्याम लाल कुकरेजा, उनके बेटे भारत कुकरेजा की बेरहमी से हुई हत्या की गुत्थी नहीं सुलझी। बहादराबाद में रोडहोल्प की वारदात घटी। यही नहीं एक देसी दवाखाना संचालक रवि कुमार की भी अपराधियों ने लूट की खातिर जान ले ली।
सप्तसरोवर क्षेत्र में भी गंगा तट पर हरियाणा के एक युवक की मामूली विवाद में फक्कड़ साधु ने हत्या कर दी और अब साल के अंतिम दौर में एक दिव्यांग ने अपनी दिव्यांग पत्नी को मौत की नींद सुला दिया।
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शहर को सांप्रदायिकता की आग में झोंक की कोशिश
हरिद्वार। शहर के अमन चैन में आग लगाने की घिनौनी साजिश हुई। बजरंग दल से जुड़े युवकों ने कनखल में मुस्लिम समुदाय के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। बेरहमी से मुस्लिम समुदाय के लोगों को पीटा गया। उनके प्रतिष्ठान में तोड़फोड़ की गई। बड़ी बात ये है कि शहर को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की कोशिश करने वालों के साथ वीआईपी ट्रीटमेंट के साथ कोर्ट में पेश किया और मुकदमे में धाराएं भी कम कर दी गई।
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गिरफ्तारी हुई टुल्ली की, धड़कन बढ़ी शहर की
हरिद्वार। कुख्यात सुनील राठी की मां राजबाला की गिरफ्तारी के बाद देहरादून से भी हरिद्वार पुलिस की पीठ थपथपाई गई। फिर राठी से जुड़े होने के आरोप में प्रॉपर्टी डीलर टुल्ली की गिरफ्तारी हुई। टुल्ली की गिरफ्तारी के बाद दूसरी गिरफ्तारी नहीं हुई। हां, पूरे शहर की आफत जरूर आई। एक-एक कर पुलिस आमजन को बुलाकर प्रताड़ित करने में जुटी रही। इससे शहर के राजनीतिक दलों और प्रॉपर्टी डीलरों से लेकर कई दूसरे कारोबार से जुड़े लोगों की धड़कने बढ़ी रही।
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किटी के नाम भी रहा यह साल
हरिद्वार। गुजरते साल में किटी प्रकरण सुर्खियाें में रहा। भाजपा से जुड़े रहे दंपति संविदर सिंह उसकी पत्नी गुरप्रीत कौर ने शहरवासियों को करोड़ों की चपत लगाई। किटी क्वीन के नाम से शहर में मशहूर हुई गुरप्रीत कौर को हाल ही में जमानत मिली। जीआईजी किटी ग्रुप के नाम से दंपति किटी के गोरखधंधे की कमान संभाल रहा था और जीआईजी मार्ट नाम से पुराना रानीपुर मोड़ के पास बड़ा शोरूम खोला हुआ था। दूसरी किटी क्वीन के तौर पर भाजपा की महिला नेता शिवांगी त्रिपाठी बनकर उभरी। हाईकोर्ट से स्टे मिलने के चलते शिवांगी की गिरफ्तारी नहीं हुई, पर उसकी फजीहत खूब हुई। यही नहीं किटी से जुड़े दो तीन मामले शहर के अलग अलग थाने कोतवाली में दर्ज हुए।
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