श्रीनगर। विकास खंड खिर्सू के पोखरी गांव में हिताक्ष भैरव का तीन दिवसीय मंडाण (देव नृत्य) हवन और भंडारे के साथ संपन्न हो गया है। पूजा समापन पर भक्तों ने देवताओं के पश्वाओं से आशीर्वाद लिया।
हीत बहुगुणा जाति के लोगों का ईस्ट देव है। सीताराम बहुगुणा ने बताया कि हित देवता बटुक भैरव का ही स्वरूप है। हित शब्द का अर्थ है दूसरे का भला करने वाला। हीत भूमि का देवता माना जाता है। इसलिए इसे भूम्याल कहते हैं।
हिमालय क्षेत्र में इसे कुल देवी नंदा के धर्म भाई के नाम से भी जाना जाता है। पोखरी में इसका प्राचीन मंदिर है। यह समय-समय पर हिताक्ष भैरव मंडाण का आयोजन किया जाता है। इस बार 17 सालों बाद इसका आयोजन किया गया।
27 दिसंबर से शुरू हुए इस पूजन कार्यक्रम में हीत के अलावा गांव में पूजे जाने वाले देवी अन्नपूर्णा, भुवनेश्वरी, श्मशानी, नागराजा, नरसिंग व करणी देवी आदि की भी पूजा की गई। हित के पश्वा मनोज बिष्ट ने लोहे के दंड के साथ नृत्य किया। शुक्रवार को पूर्णाहुति और भंडारे के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन हो गया।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडियों ने भाग लिया। समापन अवसर पर माहौल भावुक नजर आया। इस मौके पर आशुतोष बहुगुणा, ललित मोहन बहुगुणा, महादेव, प्रमोद बहुगुणा, उमेश बहुगुणा, बालकृष्ण बहुगुणा, संजय बहुगुणा व कमलेश बहुगुणा आदि मौजूद थे।