ब्यूरो/अमर उजाला
सेलाकुई।
तमाम जद्दोजहद के बाद आखिर बुधवार को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शीशमबाड़ा में सीआरपीएफ को आवंटित भूमि पर किए गए कब्जे हटा दिए। करीब छह घंटे चली कार्रवाई के दौरान एक दर्जन जेसीबी से 280 पक्के निर्माणों को ढहाया गया। इस दौरान कब्जे करने वालों ने घरों को न उजाड़ने की गुहार लगाई, लेकिन अवैध निर्माण को हटाने के बाद ही पुलिस-प्रशासन की टीमें वापस लौटी।
एडीएम अरविंद कुमार पांडेय ने सीआरपीएफ के अधिकारियों को खाली कराई गई भूमि पर शीघ्र कब्जा लेने के निर्देश दिए। बुधवार की सुबह करीब आठ बजे एडीएम और एसपी सिटी प्रदीप राय की अगुवाई में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी झाझरा पुलिस चौकी पहुंचे। करीब साढ़े आठ बजे वे सभी शीशमबाड़ा पहुंचे। कब्जों को हटाने के लिए पूरे इलाके को चार जोनों में बांटा गया। जिनमें एसडीएम और सीओ की तैनाती की गई। अनाउंसमेंट कर सभी लोगों से मकानों को खाली करने के लिए कहा गया, हालांकि अधिकांश लोग पहले ही अपना सामान समेट कर जा चुके थे। सुबह 10 बजे जेसीबी से अवैध निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई शुरू हुई, जो शाम करीब चार बजे तक चली।
इस मौके पर एसडीएम विकासनगर जितेंद्र कुमार, एसडीएम सदर प्रत्यूष कुमार, एसडीएम ऋषिकेश हर गिरी, सीओ विकासनगर पंकज गैरोला, सीओ सिटी चंद्रमोहन, तहसीलदार प्रकाश शाह, एसओ सहसपुर पंकज देवरानी, एसओ प्रेमनगर मुकेश त्यागी, पटेलनगर कोतवाल रितेश शाह शामिल रहे।
प्रशासन की लापरवाही से हुए थे कब्जे
वर्ष 2013 में शासन ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को शीशमबाड़ा में सात हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी, लेकिन प्रशासन की लापरवाही से यहां अवैध कब्जे हो गए। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही हलका लेखपाल की रही। इस मामले में खास बात ये रही कि यहां कब्जा करने वालों के सरकारी सिस्टम ने राशन कार्ड और वोटर कार्ड बना दिए थे। इसके अलावा बिजली के कनेक्शन भी जारी कर दिए गए।