कीर्तिनगर। उचित कीमत नहीं मिलने तथा विपणन की उचित व्यवस्था के अभाव में डागर पट्टी के कई गांवों में अदरक खेतों और घरों बर्बाद हो रहा है। काश्तकारों की आय दोगुना करने की सरकारी योजना भी इस क्षेत्र में परवान नहीं चढ़ पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार अदरक की कीमत करने के बाद भी अदरक घरों और खेतों में ही पड़ा है।
विकासखंड के डागर, कोटी, जाखी, बैजवाड़ी, गवाणा सहित करीब एक दर्जन गांवों में ग्रामीण विगत कई सालों से बड़े पैमाने पर अदरक का उत्पादन कर रहे है, लेकिन आज तक सरकार की ओर से उत्पादित अदरक के विपणन की उचित व्यवस्था नहीं किए जाने से अदरक तो खेतों में सड़ जाता है या फिर उन्हें मिट्टी के भाव बिचौलियों को बेचना पड़ता है।
काश्तकार रणवीर सिंह, सोबन सिंह, भीम सिंह, विजय सिंह, अवतार सिंह का का कहना है कि वह बड़े स्तर पर अदरक का उत्पादन कर अपने परिवार की रोजी-रोटी चलाते है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष की तुलना में इस बार ग्रामीणों ने अदरक के दाम करीब दस से पंद्रह रुपये प्रति किलो कम भी कर दिए है। बावजूद इसके गांव में कोई खरीददार नहीं पहुंच रहा है। कई लोगों ने गेहूं की बुआई के लिए खेतों से अदरक उखाड़ कर घरों में भरा है, जबकि कई लोगों का अदरक खेतों में ही है। घरों में रखा गया अदरक जहां सड़ने की कगार पर है, वहीं खेतों में अदरक होने से लोग गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से शीघ्र अदरक के विपणन की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
-खरीद का काम मंडी परिषद का है। हमारे विभाग में विपणन की न तो कोई व्यवस्था है और ना ही इस संबंध में शासन से कोई आदेश हैं।-आरएस नेगी, कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी, कीर्तिनगर।