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संस्कार, विज्ञान और भाषाओं की जननी है संस्कृत

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गोपेश्वर। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से रविवार को आयोजित संस्कृत गोष्ठी में वक्ताओं ने संस्कृत को संस्कार, विज्ञान और विश्व की सभी भाषाओं की जननी बताया। देश की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के विकास और प्रसार पर भी गोष्ठी में चर्चा हुई।
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जिला पंचायत सभागार में सुबह 11 बजे उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव सुरेश चंद्र बहुगुणा ने दीप प्रज्ज्वलित कर संस्कृत गोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की द्वितीय राजभाषा है। सरकारों के साथ ही आम लोगों को भी संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है। आम लोगों में भ्रांति है कि संस्कृत भाषा बोलने और लिखने में बेहद कठिन होती है, जबकि भारत में पूर्व काल में संस्कृत भाषा ग्रामीण स्तर पर भी आम बोलचाल की भाषा रही है।
संस्कृत महाविद्यालय मंडल के प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश डिमरी ने संस्कृत को आम जनमानस की भाषा बनाने की बात कही। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य संयोजक गिरधर सिंह भाकुनी, ऋषि राम बहुगुणा, डॉ. सुमन ध्यानी, चंद्रशेखर तिवाड़ी, प्रयाग दत्त भट्ट, मनोज तिवारी, महादेव प्रसाद भट्ट, मंगला प्रसाद, वीरेंद्र असवाल, सत्य प्रकाश मैठाणी, चंद्रकला बिष्ट और शांति प्रसाद भट्ट मौजदू थे।
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