पीपलकोटी। बंड मेले की चतुर्थ सांस्कृतिक संध्या में जय मां हरियाली सांस्कृतिक कला मंच रुद्रप्रयाग और संस्कृति विभाग के कलाकारों ने लोग गीत और लोग नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। गायिका रचना सेमवाल ने सुरीली आवाज में एक के बाद एक गीतों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
रविवार को बंड मेले में आयोजित कार्यक्रमों का शुभारंभ टीएचडीसी के महाप्रबंधक यूके सक्सेना ने किया। उन्होंने कहा कि मेलों से मेलजोल बढ़ता है। पुराने मेलों के संरक्षण पर लोगों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जय मां हरियाली संस्था की ओर से गायिका रचना सेमवाल ने जय मां धारी देवी, त्वे सेवा लांदू स्तुति से की। इसके बाद उन्होंने चंदना मेरा पहाड़ ऐई..., सुरमा.. पहाड़ की रौनक जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। गायक विनोद पंत ने पंत दिदा गीत लगो, गीत लगो..., ऐजे मेरा कान्हा धवाड़ी लगांदू.....जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। गायक राकेश कोठियाल के हे बांध तेरी स्वाणी मुखड़ी, दिल मां बसि गै गीत पर दर्शक पंडाल पर ही थिरकने लगे। वहीं, संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गायक सुनील कोठियाल ने सुणजा बात मेरी हां, मेरी गैल्याणी हां बे हां गीत से दर्शकों को कड़ाके की ठंड में भी झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर एसडीएम परमानंद राम, थानाध्यक्ष दीपक रावत, चौकी इंचार्ज ऋषिकांत पटवाल, एसएआई चंद्र प्रकाश, बंड संगठन के अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, महामंत्री हरिदर्शन रावत, विहारी लाल, हरीश पुरोहित, विजय प्रसाद मलासी, गजेंद्र राणा, महावीर राणा, अशोक गुसांई, विवेक शाह, संदीप रावत, सुरेंद्र नेगी, कुशलानंद सती, दिनेश हटवाल, नवीन वैष्णव, किशन सिंह पुंडीर, मीना बिष्ट, हुकम सिंह रावत, बहादुर सिंह भंडारी, गुलाब सिंह, प्रियंक बिष्ट, मनोज कुमार आदि मौजूद थे।
महिलाओं ने किया अंगद-रावण संवाद का मंचन
पीपलकोटी। बंड मेले में महिला पतंजलि समिति चमोली व रुद्रप्रयाग की महिलाओं ने संयुक्त रूप से अंगद-रावण संवाद का मंचन किया। पंडाल पर रावण दरबार लगाया गया। मंचन में सभी पात्र महिलाएं थीं। रामदूत बनकर रावण के पास गए अंगद ने जब रावण को भगवान राम से युद्ध न करने को कहा तो रावण ने उसे दुत्कार दिया। इस पर अंगद और रावण में तीखी नोकझोंक होती है। मंचन को दर्शकों ने भी खूब सराहा। इस मौके पर पतंजलि की सह राज्य प्रभारी लक्ष्मी शाह, लक्ष्मी रावत, बीरा फरस्वाण, सुषमा, राजेश्वरी, कल्पेश्वरी, सरोजनी आदि मौजूद थे।