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फडफडाईं बहुत पर उड़ न पाई महिला संत

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हरिद्वार ।आज महिलाएं चांद पर भी पहुंच गई हैं और पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। संत जगत एक अकेला ऐसा क्षेत्र हैं जहां महिलाओं को कभी ऊंचा पद हासिल नहीं हो सका। महिलाएं न कभी किसी अखाड़े की परमाध्यक्ष बन पाई और न अपना अलग महिला अखाड़ा बना सकीं। अब भारत मूल की जूना अखाड़े की नेपाल की महिला संत ने जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर दावा ठोका है। 58 दावेदारों में से वह अकेली महिला संत दावेदार के रूप में हैं। अब देखना है कि पुरुषों के एकाधिकार संत जगत में एक महिला को कितना सम्मान मिल पाता है।
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देश में संन्यासियों, वैरागियों, उदासियों और निर्मलों के 13 अखाड़े हैं। अनादिकाल से लेकर आज तक किसी भी अखाड़े में सभापति या मंत्री का पद महिलाओं को नही मिल पाया। सभी अखाड़ों में महिला संत और महिला नागा संन्यासी हैं, लेकिन किसी को भी उच्च पद के योग्य नहीं समझा गया। यह तब है जब सभी अखाड़ों ने औरतों को महामंडलेश्वर पद प्रदान किए हैं। महिला संतों ने जब महिलाओं के लिए परी अखाड़ा बनाने की पूरी तैयारी कर ली तब उनकी नायक त्रिकाल भवंता को उज्जैन से खदेड़ दिया गया। यहां तक कि परी अखाड़े के नाम पर महिला संतों को कुंभ स्नान तक सामूहिक रूप से नही करने दिया गया। उन्हें पुरुष अखाड़ों के साथ पुरुषों के पीछे चलकर पवित्र नदियों के स्नान के लिए पहुंचना पड़ा।
एक बार जब दिवंगत हो चुकी अमेरिका व कनखल वासी मां योगशक्ति ने शंकराचार्य पद के समकक्ष महिला संतों के लिए पार्वत्याचार्य पद का सृजन इसी हरिद्वार में पिछलेे कुंभ से पूर्व करना चाहा तब भारी बवाल मच गया। मां योगशक्ति ने ज्योतिषानंद महाराज को विश्व की पहली महिला पार्वत्याचार्य पद पर अभिशिक्त करने के लिए कनखल में विराट समारोह का आयोजन किया। जिस समय मां ज्योतिषानंद का अभिषेक पद के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जा रहा था तभी सैकड़ों नागा संन्यासियों और वैरागियों ने धावा बोल दिया ओर पंडाल उखाड़ फेंका। यहीं नहीं, तमाम महिला संतों को हरिद्वार से बाहर जाने पर मजबूर कर दिया गया।
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अब फिर भारतीय मूल और जूना अखाड़े की नेपाल की महिला संत मां हेमानंद गिरी ने सबसे ऊंची छलांग लगाई है। उन्होेंने ज्योर्तिमठ शंकराचार्य पद के लिए अपना दावा ठोक दिया है। संतोष का विषय यह है कि उनका आवेदन भी धर्म महामंडल और काशी विद्वत परिषद ने स्वीकार कर लिया है। हेमानंद गिरी का मुकाबला शंकराचार्य पद के लिए आए अन्य 57 पुरुष संतों से है। औरतों के दंडीबाड़ों में हेमानंद के साहसिक कदम पर हर्ष का माहौल है। बड़ी आतुरता से प्रतीक्षा की जा रही है कि क्या महाविद्वान हेमानंद गिरी इस बार पुरुषों को परास्त कर पहली महिला शंकराचार्य बन पाएंगी।
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