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माफी मांगे मंत्री नहीं तो हटाने को साधु-संत राष्ट्रपति से मिलेंगे: ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप

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हरिद्वार। भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप ने केंद्रीय राज्यमंत्री सत्यपाल के बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि संत समाज राष्ट्रपति से मिलकर मंत्री को हटाने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि भगीरथ के प्रयास से गंगा मानव जाति का उदार करने को धरती पर अवतरित हुई। मंत्री के बयान से भारतीय परंपराओं के प्रचारकों को ठेस पहुंची है।
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बुधवार को जयराम आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप ने कहा कि मंत्री को अपनी संस्कृतियों का ज्ञान नहीं है। जिस व्यक्ति को देश की संस्कृति और गंगा के बारे में ही पता नहीं उसे जल संसाधन मंत्री बनाया जाना ही गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में गंगा ने बुलाया है कहकर लोगों की भावना से जुड़े थे, लेकिन अब उनके मंत्री गंगा को अपमान करने का काम कर रहे हैं । उनके वक्तव्य से सनातन धर्मियों को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि मंत्री अपने बयान को वापस लें और माफी मांगें। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे अनेक धर्मनगरी और तीर्थ स्थल हैं। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भी संतों को जल समाधि देने का विरोध करते हैं, जिसे संत समाज स्वीकार करता है, लेकिन संतों को पहले 50 एकड़ भूमि उपलब्ध कराए। सीएम अंधविश्वास की बातें करते हैं। वह तो देवभूमि के हैं और उन्हें तो संस्कृति का ज्ञान होना चाहिए था। सीएम को तो विवेक से काम लेना चाहिए था। इस मौके पर महंत देवानंद सरस्वती, महंत रविंद्र पुरी, महंत अर्जुनपुरी, स्वामी हरिचेतानंद महाराज, महंत कृष्णा गिरि, स्वामी कामेश्वर पुरी आदि शामिल हुए।
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गंगा का उद्गम अस्थि विसर्जन और मोक्ष के लिए हुआ
हरिद्वार। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने केंद्रीय राज्यमंत्री के बयान की निंदा की। महासभा के वरिष्ठ महामंत्री श्रीकांत वशिष्ठ ने कहा कि मंत्री को हिंदुओं के शास्त्रों की अध्ययन करना चाहिए। उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिखौला ने कहा कि हरकी पैड़ी पर पूर्व कालों से अस्थि विसर्जन होता आ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परंपराओं के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा. सत्यनारायण ने कहा कि जो गंदे नाले गंगा में गिरकर प्रदूषित कर रहे हैं, उन्हें बंद करने को कोई बयान तक नहीं दिया। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा के महामंत्री अंकुर पालीवाल ने कहा कि गंगा का उद्गम ही सनातन परंपरा संरक्षण, अस्थि विसर्जन और मोक्ष के लिए हुआ है। जिलाध्यक्ष गौरव कपिल, युवजन सभा के प्रदेश महामंत्री मोहित भारद्वाज ने कहा कि मंत्री को गंगा प्रदूषित होने के कारक नजर नहीं आए और वह बयानबाजी कर सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं।
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मंत्री का बयान सनातन धर्म पर घोर कुठाराघात: श्रीमहंत नरेंद्र गिरि
हरिद्वार। भीमगोडा जगन्नाथ धाम में रामानंदाचार्य जगद्गुरू स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि अनादिकाल से चली आ रही परंपराओं पर केंद्र के मंत्री अनर्गल बयानबाजी देकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा मैया पूरे देश में गोमुख से लेकर गंगा सागर तक निर्मल धारा की तरह बहती है। ऐसे में इस तरह की बातें कहना कि गंगा में अस्थि प्रवाहित नहीं होगी यह हमारी परंपराओं के साथ कुठाराघात है। दक्षिण काली मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज ने कहा कि गंगा पूरे देश सहित विदेशों तक के लोग गंगा में अपने परिजनों की अस्थियों को प्रभावित करने हरिद्वार आते हैं। ऐसे बयानों से उनकी आस्था को ठेस लगेगी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत बलवंत सिंह, मुखिया महंत भगतराम, महंत धूनीदास, स्वामी कपिल मुनि महाराज आदि ने मंत्री के बयान की निंदा की।
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