हरिद्वार। शांतिकुंज में पांच दिवसीय नारी चेतना शिविर का सोमवार को समापन हो गया। शिविर में राजस्थान की कोटा, जयपुर, उदयपुर सहित 12 जिलों की चयनित बहनों ने भाग लिया। समापन मौके पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि ऋषियों ने नारियों को समाज निर्माण की धुरी माना है। सुसंस्कारी नारी ही परिवार, समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाती हैं। गायत्री परिवार के करोड़ों परिजन विभिन्न कार्यक्रमों के साथ समाजोत्थान के कार्य में जुटे हैं।
संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि जहां नारी सुशिक्षित, सुसंस्कारी एवं स्वावलंबी होगी, वहीं परिवार, समाज और राष्ट्र विकास की दिशा में उत्तरोत्तर प्रगति करेगा। उन्होंने प्रतिभागियों को स्वावलंबी बनने के विभिन्न सूत्रों की जानकारी दी। शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए शेफाली पंड्या ने कहा कि किसी भी समाज, देश की प्रगति एवं समृद्धि वहां की नारियों के विकास के स्तर पर निर्भर करता है। देश में व्याप्त कुप्रथाओं को मिटाने के लिए बहनों में जागरूकता जरूरी है। गायत्री विद्यापीठ की व्यवस्था मंडल की प्रमुख पंड्या ने नारियों को दहेज प्रथा, कुरीति उन्मूलन, बाल विवाह जैसे बुराइयों को मिटाने के लिए स्वयं से शुरुआत करने की बात कही, तो वहीं बालक बालिकाओं में समान रूप से व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया।
महिला मंडल की भारती नागर ने बताया कि पांच दिन तक चले इस शिविर में राजस्थान के कोटा, जयपुर, उदयपुर, अजमेर, सीकर, जोधपुर समेमत राज्य के 12 जिलों की चयनित बहनें शामिल रहीं। शिविर में पूर्णिमा अग्रवाल, सुशीला अनघोरे, श्यामा, नीलम मोटलानी, ज्योत्सना मोदी, शालिनी आदि ने प्रतिभागियों को परिवार को सुसंस्कारी बनाने, कुटीर उद्योग तक के सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिए।