हरिद्वार। कड़ाके की ठंड के बीच सोमवार को देश भर से आए श्रद्धालु सोमवती अमावस्या का पवित्र स्नान करेंगे। स्नान मूल नक्षत्र में तड़के चार बजे प्रारंभ होगा और सायंकाल तक चलेगा। अमावस्या के दो दिन पड़ने से ब्रह्ममुहूर्त में स्नान का विशेष महत्व होगा। हजारों श्रद्धालुओं ने पितृ अमावस्या का श्राद्ध तर्पण संपन्न कराया।
सोमवती अमावस्या लंबे समय के बाद पौष मास में पड़ी है। इस महीने को खर मास कहा जाता है और धार्मिक कार्य के लिए शुभ नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस अमावस्या पर महिलाएं पीपल के वृक्षों की परिक्रमा तो करेगी, लेकिन उद्यापन, शैय्या दान और देवभोज आदि नहीं होंगे। खर मास में उद्यापन निषेध किया है।
पूर्णिमा के दो दिन पड़ने से पितरों के निमित अमावस्या रविवार को संपन्न हो गई। सवेरे से ही कुशावर्त घाट और नारायणी शिला पर श्राद्ध तर्पण करने वालों का पहुंचना प्रारंभ हो गया था। श्रद्धालुओं ने पितृ निमित श्राद्ध किए और कालसर्प योग का निवारण भी कराया। पितृदोष का निवारण कराने के लिए लघु अनुष्ठान यज्ञ आयोजित किए गए। वहीं समोवती अमावस्या स्नान के लिए रविवार शाम को ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंच गए थे। देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का क्रम जारी था। पंजाब, जम्मू कश्मीर और दिल्ली से काफी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे हैं। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान के बाद धार्मिक कार्य भले ही न हों, लेकिन नगर भर के पीपल के वृक्षों पर सूत के धागे लपेटते हुए महिलाएं परिक्रमा अवश्य करेंगी। नियमानुसार परिक्रमा करने वाली महिलाएं प्रत्येक सोमवती पर अलग-अलग किस्म के खाद्य पदार्थों का वितरण करती है। इस बार यह वितरण खर मास के चलते नहीं होगा।