श्रीनगर। ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार को लाभांश देने के बावजूद उनका हिस्सा छीनने की कोशिश की जा रही है। विरोध स्वरूप अधिकारी/कर्मचारी 21 दिसंबर को श्रीनगर में जन जागरण रैली निकालेंगे।
रविवार को उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले तीनों ऊर्जा निगमों में कार्यरत अधिकारियों/कर्मचारियों की बैठक हुई। इसमें कहा गया कि सरकार उनको हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर कर रही है। कर्मचारियों को जो वेतन-भत्ते वर्ष 1979 से मिल रहे हैं प्रदेश सरकार उनको छीनने पर उतारू है। सरकार समयबद्ध वेतनमान में परिवर्तन कर रही है। साथ ही पे-मैट्रिक्स को बदलकर सेवा नियमावली में भविष्य के लिए विसंगति पैदा कर रही है।
उन्होंने कहा कि तीनों निगम अपना व्यय-भार वहन करने के बाद सरकार को लाभांश देते हैं। तब भी उनके हक पर डाका डाला जा रहा है। प्रबंधन और सरकार में बैठे कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 21 दिसंबर को श्रीनगर में जनजागरण रैली निकाली जाएगी। फिर भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो 26 दिसंबर को तीनों ऊर्जा निगमों के प्रबंध निदेशकों को ज्ञापन दिया जाएगा। 4 जनवरी को देहरादून में तीनों निगमों के कर्मी सचिवालय तक रैली निकालेंगे। इसके बावजूद सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो 5 जनवरी से सभी कर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे।
बैठक की अध्यक्षता एसएस बर्तवाल और संचालन एमपी लखेड़ा ने किया। आरपी नौटियाल, अनिल गुर्साइं, यतेंद्र कुमार, नरेंद्र बहुगुणा, महिपाल, दिनेश जोशी और गणेश चौहान ने भी बैठक में विचार रखे।