देवप्रयाग। विश्व भर में मातृ-पितृ भक्ति का संदेश देने वाली दशरथांचल कांवड़ रथ यात्रा की शुरुआत अलकनंदा और भागीरथी संगम से हुई। तीन दिवसीय पदयात्रा शनिवार को संगम से गंगाजल घटी लेकर कांवड़ यात्री सुरेश बडोनी रघुनाथ मंदिर पहुचे। मंदिर में पहुंचकर तीर्थ पुरोहितो ने जयकारों के साथ कांवड़ यात्रा का स्वागत किया।
यात्रा के संयोजक पूर्व काबीना मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि वर्ष 2018 में यात्रा को 12 वर्ष पूरा होने पर उत्तराखंड के चारों धामों की यात्रा कराई जाएगी। साथ ही दशरथांचल शिला पर कथा और मंदिर निर्माण का शिलान्यास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रवण कुमार कांवड़ यात्रा का मकसद युवाओ को अपने पिता और माता के प्रति आदर की भावना के लिए प्रेरित करना है। कहा कि श्रीरघुनाथ मंदिर में होने वाली अखंड महापूजा पौष माह से शुरू होने से प्रेरणा और आशीर्वाद से इस यात्रा की शुरुआत की गई है। यात्रा 52 गांवों से गुजर कर 18 दिसंबर को दशरथांचल पर्वत पहुंचेगी। यात्रा में विनोद टोडरिया, लखपत सिंह, उम्मेद सिंह, राजेंद्र सिंह, बल्लू सिंह, दिगंबर सिंह, गौरव पंचभैया, जगदीश आर्य, उदय प्रकाश टोडरिया आदि मौजूद थे।