श्रीनगर। गढ़वाल विवि स्थापना के बाद से अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। शनिवार को गढ़वाल विवि में कुलपति प्रो. कौल को हटाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की सूचना के बाद शिक्षकों, छात्रों और प्रशासनिक भवन में कर्मचारियों में खलबली मची रही। विवि के अधिकांश उच्चाधिकारी विवादों और भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हैं। कुलसचिव को कुछ दिन पहले ही कुलपति ने निलंबित किया था, जबकि विवि के वित्त अधिकारी भी भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहे हैं।
गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल पर कर्मचारियों ने अनियमितता, मुख्यालय से बाहर रहने सहित कई अन्य आरोप लगाए थे। आरोपों की जांच के लिए एमएचआरडी से दो सदस्यीय टीम ने जांच भी की थी। इस पर कुलपति प्रो. कौल से स्पष्टीकरण मांगा गया था। शनिवार को कुलपति कार्यालय भी नहीं आए।
हटे तो कार्यकाल पूरा न करने वाले पहले कुलपति होंगे
प्रो. कौल गढ़वाल विवि के ऐसे पहले कुलपति होंगे, जिन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाया जाएगा। गढ़वाल विवि की स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी। बीडी भट्ट गढ़वाल विवि के पहले कुलपति थे। प्रो. कौल गढ़वाल विवि के 24वें कुलपति हैं।