हरिद्वार। गरीबों, निराश्रितों को ठंड बचाने के लिए बने रैन बसेरों के दिन अब बहुरने वाले हैं। इनके रखरखाव और संचालन की व्यवस्था के लिए शासन ने नगर निगम को प्रतिवर्ष 18 लाख रुपये का बजट देने की सहमति प्रदान कर दी है।
धर्मनगरी में नगर निगम के तीन रैन बसेरा हैं। अब तक सरकार से उनकी व्यवस्था के लिए एक पाई भी नहीं मिलती थी। इसलिए उनका संचालन सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन के अनुुसार नहीं हो पा रहा है। दिल्ली की जिस संस्था ने रैन बसेरों की संचालन की व्यवस्था नगर निगम से ली थी वह छोड़ कर चली गई है और नगर निगम को पता भी नहीं चला। ग्रीन विस्टा का शानदार रैन बसेरा तो विरान पड़ा है और गऊघाट के सामने रोडी बेलवाला में जो दो रैन बसेरा महिला व पुरुष खुले हुए हैं। नगर निगम से इनके देखभाल की कोई व्यवस्था नहीं है। रैन बसेरों के आसपास ही कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर फड़ लगा रखी हैं और न उनका ही उन पर कब्जा है। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट मनीष कुमार और बृहस्पतिवार को सहायक नगर आयुक्त संजय कुमार ने रैन बसेरों का निरीक्षण कर उनकी दुर्दशा को देखा था। इसके बाद अब उनके रखरखाव और सुप्रीमकोर्ट के मानक के अनुसार संचालन की व्यवस्था बनाई जा रही है।
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अब तक रैन बसेरों के रखरखाव के लिए फंड की कोई व्यवस्था नगर निगम में नहीं थी। जिस कारण दिक्कत आ रही थी। 12 दिसंबर को शासन स्तर पर हुई बैठक में रैन बसेरों के संचालन और सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव रखा गया है। शासन ने रैन बसेरों का राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनयूएलएम) के तहत इनकी व्यवस्था करने पर सहमति हो गई है। नगर निगम के तीन रैन बसेरा हैं जिनके रखरखाव व संचालन के लिए शासन प्रति रैन बसेरा प्रतिवर्ष 6 लाख रुपये का बजट देगा। इस प्रकार तीन रैन बसेरों के लिए 18 लाख रुपये नगर निगम को प्राप्त होंगे। जब तक शासन से फंड नहीं मिलता है तब तक जिला प्रशासन के माध्यम से संचालन की व्यवस्था की जाएगी।
- नितिन सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त