ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार दूसरे दिन बारिश होने से ठंड में इजाफा हो गया है। भीषण ठंड और पारा माइनस में जाने से हिमपात की संभावना भी बलवती हो गई है। मंगलवार रात को बारिश और अगले दिन घना कोहरा छाने से नगरवासियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगर फिर से बारिश हुई तो साथ में बर्फ भी पड़ सकती है। वहीं, दूर-दराज से आए पर्यटक मसूरी के इस मौसम का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। हालांकि, उन्हें हिमपात का बेसब्री से इंतजार है।
पिछले दो दिनों से मौसम में आए बदलाव के कारण पहाड़ों रानी मसूरी भीषण ठंड की चपेट में है। सोमवार के बाद मंगलवार रातभर रुक-रुककर बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहा। हालांकि, अगले दिन बुधवार को बारिश तो नहीं हुई, लेकिन घने बादल और कोहरा छाने से सर्दी में इजाफा हो गया। ऐसे में मौसम में लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं। पर्यटकों को छोड़ दें तो स्थानीय लोगों की चहलकदमी बाजार में कम हो गई है। कड़ाके की ठंड के चलते आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। खासकर मेहनतकश मजदूरों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, बर्फबारी की संभावना को देखते हुए नगर में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। जिस तरह भीषण ठंड पढ़ रही है, उससे संभावना है अगर नगर के ऊंचाई वाले इलाकों में अब बादल बरसे तो बर्फ के रूप में बरसेंगे।
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अलाव नहीं जलने से नाराजगी
मसूरी। कड़ाके की सर्दी के बावजूद नगर पालिका की ओर से अलाव की व्यवस्था नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। पहले इस मौसम में हर चौक-चौराहों पर अलाव जलने शुरू हो जाते थे, जिसका लाभ नगरवासियों के साथ पर्यटक भी उठाते थे। देर रात तक मजदूर अलाव की आग से ठंड का मुकाबला करते थे। लेकिन पालिका ने इस बार अभी तक अलाव की व्यवस्था क्यों नहीं कराई, यह समझ से परे हैं। नगर पालिका परिषद के स्टोर कीपर दुर्गा प्रसाद बंगवाल का कहना है कि लकड़ी खरीदने के लिए निविदा मांगी जा रही है। इससे पहले अलाव की अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अलाव जलाए जाएंगे।
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काश्तकारों के चेहरे खिले
मसूरी। आसपास के गांवों में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के चलते ग्रामीणों में खुशी की लहर है। इन दिनों खेतों में गेहूं सहित अन्य नकदी फसलें बोई गई हैं और इनके लिए ठंड की यह पहली बारिश बेहद उपयोगी है। मसूरी के निकटवर्ती भट्टा, क्यारकुली आदि के किसानों के चेहरे पर खुशी की लहर है। कारण, इन दिनों बारिश की खास आवश्यकता थी और लंबे समय से बारिश नहीं होने से किसान परेशान थे। उनका कहना है कि यह बारिश नकदी फसलों के बेहद लाभकारी होगी।