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यूपी निर्माण निगम में नहीं हुआ कोई घोटाला: जीएम

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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निर्माण कार्यों में अनियमितताओं और वित्तीय घोटाले के आरोपों से चौतरफा घिरने के बाद उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के जीएम पीके शर्मा बुधवार को अपनी टीम के साथ सामने आए। जीएम ने निगम पर लगे आरोपों को बेबुनियाद ठहराया और कहा कि ऑडिट में किसी तरह की कोई गड़बड़ी उजागर नहीं हुई है।
यहां पत्रकारों से बातचीत में पीके शर्मा ने कहा कि निगम 2009 से उत्तराखंड में 4500 करोड़ के 482 प्रोजेक्टों पर कार्य कर रहा है। करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। निगम का 1410 करोड़ रुपये उत्तराखंड शासन पर बकाया है। शासन ने अप्रैल 2017 में निगम के कार्यों पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई निगम के तत्कालीन जीएम के घर आयकर की छापेमारी के बाद हुई। इसके बाद से ही निगम पर घोटालों और अनियमितताओं को लेकर अंगुली उठनी शुरू हो गई। उन्होंने दावा किया कि आयकर विभाग की टीम को तत्कालीन जीएम के घर से 50 हजार से अधिक नगदी नहीं मिली। इसके बाद भी निगम के कार्यों को प्रतिबंधित कर दिया।
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जीएम ने कहा कि 804 करोड़ के ऑडिट में 800 करोड़ के घोटाले का आरोप हास्यास्पद है। निगम को बदनाम करने की साजिश हो रही है। उन्होंने सेंटेज में छूट की वजह से 100 करोड़ की अनियमितता और 4500 करोड़ की राशि में 38 करोड़ के ब्याज घोटाले पर भी सफाई दी। शर्म ने कहा कि निगम को सेंटेज में कोई राहत नहीं दी गई है। 2008 के बाद सरकार ने सेंटेज में कटौती कर पांच फीसदी की छूट को खत्म कर दिया था। ब्याज में अनियमितता के आरोप पर जीएम ने कहा कि योजनाएं पूरी होने के बाद ब्याज की राशि संबंधित विभाग एवं ग्राहकों के खातों में क्रेडिट होती है। लेबर सेस और सर्विस टैक्स के समायोजन के बाद ही ब्याज खातों में क्रेडिट होता है। इस दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर केके यादव, डीसी पंत समेत कई इंजीनियर मौजूद थे।
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