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हिमपात के साथ ही ब्रह्मताल-भींकलताल ट्रेक पर पहुंचे पर्यटक

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देवाल। चमोली जिले के मुख्य पर्यटक स्थलों में शामिल ब्रह्मताल और भींकलताल हिमपात के बाद अब पर्यटकों से गुलजार होने वाले है। मौसम का पहला ट्रैकिंग दल ब्रह्मताल, भींकलताल का दीदार कर लोहाजंग लौट गया है।
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प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ब्रह्मताल और भींकलताल में जमकर बर्फबारी हुई है। यहां बर्फबारी होने के बाद अप्रैल मई तक लगातार पर्यटक पहुंचते हैं। मंगलवार को चंडीगढ़ से श्रीधरन, महाराष्ट्र से बिक्रम यादव, केरल से बैंकट और दिल्ली से भवनीया सहित 10 पर्यटकों का दल ब्रह्मताल-भींकलताल की सैर कर लोहाजंग पहुंचा। दूसरी ओर थराली से वन विभाग की छह सदस्यीय टीम रेंजर गोपाल सिंह बिष्ट के नेतृव में इस पैदल रूट का जायजा लेने ब्रह्मताल पहुंची। विभाग की टीम में शामिल सोबन बिष्ट, भरत बिष्ट, मनोहर सिंह, हुकम सिंह की वापसी मंगलवार को हुई।

अप्रैल तक बुक हुए लोहाजंग के होटल
ब्रहमताल-भींकलताल, रूपकुंड-वेदनी में हर साल हजारों पर्यटक आते है। इससे यहां सैकड़ों लोगो को रोजगार भी मिला है। देश की बड़ी ट्रैकिंग कंपनियों ने भी स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है। इन कंपनियों द्वारा देश-विदेश के पर्यटकों को यहां पर लाया जाता है। इस बार ब्रह्मताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। लोहाजंग के व्यवसायी इंद्र सिंह राणा ने बताया कि भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद से बंगलूरू, दिल्ली, चंडीगढ़ और राज्य की ट्रैकिंग कंपनियों द्वारा लोहाजंग के होटलों को अप्रैल तक के लिए एंडवास में बुक करा लिया गया है।
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इनका कहना है-
यह रूट वन विभाग के अंतर्गत है। ब्रह्मताल और भींकलताल में विभाग को हट बनाने चाहिए। वहीं पैदल रूट में पेयजल तथा सुधारीकरण का काम करना चाहिए, ताकि पर्यटकों को अधिक सुविधाएं मिल सके।
-----भुवन बिष्ट, गाइड, लोहाजंग।
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इस ट्रैक रूट क विभाग की ओर से दो साल पहले मरम्मत की गई थी। यहां पर अन्य व्यवस्थाओं के लिए कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
---- टीएस बिष्ट, रेंजर, वन विभाग, देवाल

ऐसे पहुंचे ब्रह्मताल, भींकलताल
हल्द्वानी, देहरादून से पहला पड़ाव लोहाजंग है। लोहाजंग से 8 किलोमीटर की दूरी पर दूसरा पड़ाव भींकलताल है। तीसरा पड़ाव सात किलोमीटर दूर ब्रह्मताल है। यहां से 11 किलोमीटर दूर वाण है, लेकिन ब्रह्मताल-वाण रूट में अधिक बर्फवारी के कारण कई पर्यटक ब्रह्मताल से ही वापस भींकलताल और लोहाजंग आते है।
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