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रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में टेली रेडियोलॉजी का सहारा

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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज में रेडियोलॉजिस्ट के अभाव को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग टेली रेडियोलॉजी शुरू करने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा अनुबंधित चिकित्सकों को एक-एक माह के लिए मेडिकल कालेज में सेवा देने के लिए बुलाने की भी योजना है।
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राजकीय मेडिकल कालेज के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में फैकल्टी के अभाव में लगभग 10 माह से अल्ट्रासाउंड बंद हैं। यहां रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने के बाद पिछले एक साल ही अल्ट्रासाउंड हो पाए थे। इससे पहले तीन साल तक अल्ट्रासाउंड नहीं हुए थे। इसके अलावा कालेज में सीटी स्कैन और एक्सरे तो होते हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में रिपोर्ट नहीं मिल पाती है।
अल्ट्रासाउंड बंद होने से सबसे अधिक समस्या गरीब और गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है। बाजार में अल्ट्रासाउंड कराना काफी महंगा पड़ता है। साथ ही रिपोर्ट के सही होने की भी गारंटी नहीं होती है।
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कई जगह हाथ-पैर मारने के बावजूद चिकित्सा शिक्षा विभाग को रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में विभाग ने बीच का रास्ता निकाला है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डा. आशुतोष सयाना ने बताया कि टेली रेडियोलॉजी होने से सीटी स्कैन और एक्सरे रिपोर्ट मिलने लगेगी। जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए पीएनडीटी एक्ट के तहत लाइसेंस जरूरी है। इसको टेलीरेडियोलॉजी के माध्यम से नहीं किया जा सकता है। ऐसे में टेलीरेडियोलॉजी के लिए अनुबंधित चिकित्सकों से ही एक-एक माह के लिए मेडिकल कालेज में सेवा देने का अनुरोध किया जाएगा। इसके लिए इन्सेंटिव और अनुभव जैसी सुविधाएं संबंधित चिकित्सक को दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसे में मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड होने लेगेंगे।
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