मौसम बदलते ही खांसी जुकाम की चपेट में बच्चे
-- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने कम होने से बच्चों को लगते है रोग
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
यूं तो सर्दी के मौसम को हेल्दी सीजन के तौर पर जाना जाता है, लेकिन पल-पल बदल रहे मौसम के मिजाज को देखते हुए खासकर बच्चों को खांसी जुकाम की समस्या होने लगी है। सर्दी के साथ खुश्क हवा ने बच्चों को बीमार करना शुरू कर दिया है। इस मौसम में निमोनिया की भी शिकायत मिल रही है। यही वजह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोईवाला में प्रतिदिन 100 से अधिक बच्चे शीतकाल में होने वाले ऐसे रोगों के उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
डोईवाला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 12 वर्ष तक की आयु के बच्चे शीतकाल में होने वाले रोगों के उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। गिरते हुए पारे के दौरान बच्चों को बचाने के लिए चिकित्सक के अनुसार कंगारू केयर और ब्रेस्ट फीडिंग सबसे अच्छे तरीके है। नवजात शिशु को ठंड से बचाने का सबसे सरल तरीका बच्चों को शरीर से चिपका कर रखना है। इसे कगांरु तकनीक कहा जाता है। इससे नवजात का बाहरी ठंड से बचाव हो जाता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोईवाला के चिकित्सा अधीक्षक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस पाल ने बताया कि शीत ऋतु में छोटे बच्चों के अतिरिक्त खासतौर पर नवजात शिशु को अधिक देखभाल की जरूरत होती है। शिशुओं को जुकाम ज्यादा इसलिए होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षक प्रणाली (इम्यून सिस्टम) अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होती। जब सर्दी जुकाम से ग्रस्त कोई व्यक्ति छींकता है या खांसता है तो उसके विषाणु हवा में फैल जाते हैं और किसी अन्य व्यक्ति से सांस के जरिए अंदर पहुंच जाते हैं।
ऐसे करें बचाव :
- बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं।
- बच्चें के शरीर पर किसी तेल से हल्का मसाज करें।
- प्रतिदिन कुछ समय बच्चे को धूप में जरूर रखें।
- तौलिया आदि किसी मुलायम कपड़े को गीलाकर बॉथ कराएं।
- बच्चा यदि कुछ खाने पीने में रुचि न दिखाएं तो चिकित्सक को दिखाएं।