हरिद्वार। नगर निगम आम जनता से जुड़े दो महत्वपूर्ण कार्यों के झंझट से अपने को मुक्त करने जा रहा है। वह अपने सबसे अहम कार्य संपत्ति कर की वसूली और शहर की स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को आउटसोर्सिंग पर देने की तैयारी कर रहा है।
आउटसोर्स का मतलब एक प्रकार से राजस्व वसूली का काम अपने कर्मचारियों से न करवाकर एक ठेकेदार या कंपनी से कराया जाएगा। अधिकारियों को मानना है कि इससे नगर निगम की राजस्व वसूली बढेे़गी। कभी खत्म नहीं होने वाली कर्मचारियों की समस्याओं से भी नगर निगम को मुक्ति मिल जाएगी। नए कर्मचारियों की भर्ती करने के झंझट से भी निजात मिल जाएगी। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को भी निगम आउटसोर्सिंग पर देने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले नगर निगम से पेयजल और सीवर की व्यवस्था छीनी गई। उसके बाद घर-घर से कूड़ा कलेक्शन और कूड़ा निस्तारण जैसे सफाई व्यवस्था का काम भी पीपीपी मोड़ दे दिया गया है। कर वसूली और शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था आउटसोर्सिंग पर जाने से अधिकारियों को मात्र कंपनी या ठेकेदार के काम पर निगरानी रखनी होगी।
बोर्ड में प्रस्ताव पास करने पर टेंडर से निर्धारित होंगी कंपनी
मेयर मनोज गर्ग ने बताया कि टैक्स वसूली के लिए टारगेट निश्चित दिया जाएगा। जिसकी वसूली करने पर निश्चित प्रतिशत में धनराशि दी जाएगी। इसी प्रकार स्ट्रीट लाइट की निर्धारित दरें तय करते हुए मरम्मत आदि का टारगेट दिया जाएगा। इसके लिए 7 दिसंबर को नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। उसमें लिए गए निर्णय को बोर्ड बैठक में रखकर पास कराया जाएगा। प्रस्ताव पास होने पर एजेंसी तय करने के लिए टेंडर निकाला जाएगा। जो कंपनी उचित रेट पर कार्य करेगी या जिसके पास अनुभव होगा, उसे काम दिया जाएगा।
कार्यरत कर्मचारी हटाए नहीं जाएंगे: मेयर
मेयर मनोज गर्ग का कहना है कि संपत्ति कर की वसूली और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को आउटसोर्सिंग पर देने से नगर निगम की आय बढ़ेगी। आउटसोर्स (कंपनी या ठेकेदार) वाले को फायदा तभी होगा जब वह संपत्ति कर पूरा जमा करेगा। इससे शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुदृढ़ होगी और जनता को अच्छी व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में नए परिसीमित क्षेत्रों को मिलाकर सार्वजनिक पथ-प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) के लगभग 16 हजार पोल और प्वाइंट होंगे। उन्हें एक बार निगम एलईडी में परिवर्तित कर देगा। अभी तक लगभग 7500 पोलों पर एलईडी लगाई जा चुुकी है। सभी पोलों व प्वाइंटों को एलईडी लाइट लगने के बाद उसकी मरम्मत आउटसोर्सिंग से करवाई जाएगी। इससे बिजली की बचत के साथ-साथ राजस्व की बचत भी होगी। अभी सरकार से जो ग्रांट मिलती है उसमें स्ट्रीट लाइट खर्च का पैसा ग्रांट से कटता है। मेयर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कार्यरत किसी कर्मचारी को हटाया नहीं जाएगा। उन्हें दूसरे कामों में लगाया जाएगा।