अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम से घर मिलने के बाद भी लाभार्थियों ने कब्जाई सरकारी जमीन नहीं छोड़ी है। नगर निगम ने पांडेवाला ज्वालापुर में बने बीएसयूपी परियोजना में निर्मित 96 आवासों में से 71 आवासों की 16 नवंबर को लाटरी निकालकर अलाटमेंट की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। लाभार्थियों को अलाटमेंट के साथ ही उस सरकारी भूमि को खाली कर नगर निगम तथा संबंधित विभाग के हैंडओवर करना था, जिस पर उन्होंने कब्जा कर रखा था।
अब एक सप्ताह के बाद भी लाभार्थियों ने अवैध कब्जा नहीं छोड़ा है। सूत्रों ने बताया कि नगर निगम चुनाव तक कुछ भाजपाई इन परिवारों को वर्तमान वार्डों में रखना चाहते हैैं ताकि आवास दिलाने के बदले उनके वोट प्राप्त किए जा सकें।
इन लाभार्थियों को दिखाकर भाजपा और भी अवैध बस्तियों के लोगों को भी आवास दिलाने का झांसा देकर लामबंद करने का काम कर रही है। जिन 71 लाभार्थियों को पांडेवाला में आवास अलाट किए गए हैं, उनमें से अभी किसी ने भी गृह प्रवेश नहीं किया है। उन्होंने आवासों में टूट-फूट होना बताया है। जिसको ठीक कराने के लिए नगर निगम ने कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को लिखा है। सूत्रों ने यह भी बताया कि नियमानुसार अब तक किसी भी लाभार्थी ने 350 रुपये महीने की किस्त नगर निगम में जमा नहीं कराई है। इन लोगों को आवंटित आवास के बदले 350 रुपये प्रतिमाह की दर 40 हजार रुपये अदा करने हैं।
जिन लोगों को आवास आवंटित किए गए उनमें औद्योगिक क्षेत्र हरिद्वार की इंदिरा बस्ती, नगर निगम परिसर से सटी टंकी नंबर छह, नहर पटरी साइड, नगर निगम के टाउन हॉल की सड़क किनारे और शिवलोक कालोनी टिबड़ी के शहरी गरीब परिवार शामिल हैं।
तीन निगम कर्मियों को भी दिया कब्जा
नगर निगम प्रशासन ने सत्तारूढ़ भाजपा के राजनीतिक दबाव में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शहरी गरीबों के लिए बनाए गए आवासों में से तीन आवास नगर निगम कर्मियों को दे दिए हैं। दो आवास तो बाप-बेटे को मिल गए हैं। बाप नगर निगम से सेवानिवृत्त है और बेटा संविदा पर कार्यरत है। एक अन्य आवास भी कार्यरत कर्मचारी को दिया गया हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि पात्रता के हिसाब से उन्हें बीएसयूपी के आवास अलाट नहीं किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने उन्हें दबाव में कब्जा तो दिया है, उनके नाम अलाटमेंट कर कोई अधिकारी अपने को फंसाना नहीं चाहता है।
जिन लाभार्थियों को पांडेवाला में बीएसयूपी के आवास आवंटित किए गए हैं। उन्होंने आवासों की मरम्मत कराने को लिखा था। कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को 15 दिन में आवासों की मरम्मत कराने को लिखा है। आवासों की मरम्मत होने के बाद आवंटियों को आवास में शिफ्ट कराया जाएगा। - पीके बंसल, सहायक नगर अधिकारी