अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
देवोत्थान एकादशी से शुरू हुए विवाह सीजन को एक बार फिर दो महीनों के लिए विराम मिल जाएगा। यह सीजन पूरे चार महीने बाद शुरू हुआ था। पर्व विहीन सीजन का सन्नाटा तोड़ने के लिए अलबत्ता सोमवती अमावस्या आ रही है। दो महीनों के विराम के बाद विवाहों का सीजन फिर फरवरी में शुरू होगा।
देव गुरु बृहस्पति और दैत्य गुरु शुक्र के उदय होने पर विवाह शुरू होते हैं। इन दोनों ग्रहों के अनुपस्थिति में विवाह नहीं होते। पौष मास में भी विवाह बंद रहते हैं। इसके बाद 15 दिसंबर को शुक्रास्त हो जाएगा। परिणाम स्वरूप देव कार्य नहीं होंगे। 18 दिसंबर को सोमवाती अमावस्या का महापर्व पड़ रहा है। इस अमावस्या पर हरिद्वार में यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। सोमवती अमावस्या यदि पौष मास में पड़े तो देव कार्य नहीं होते। यही कारण है कि पौष मास में सोमवती अमावस्या आने पर उद्यापन आदि मांगलिक कार्य एक बार फिर से रुक जाएंगे। पौष मास चार दिसंबर को शुरू होगा और दो जनवरी पूर्णिमा को संपन्न होगा। उसी दिन से एक महीने चलने वाला माघ स्थान प्रारंभ होगा। माघ में श्रद्धालु विभिन्न तीर्थों पर जाकर कल्पवास करते हैं। देेश में सबसे बड़ा कल्पवास प्रयाग में होता है। हरिद्वार में भी सैकड़ों श्रद्धालु महीने भर रहकर माघ स्थान करते हैं। जबकि माघ के अंतिम पांच दिनों में पंचस्नानी के लिए हजारों श्रद्धालुओं का आगमन होगा।
कार्तिक पूर्णिमा से हरिद्वार में लगभग सन्नाटा है। दिन के समय अवश्य कर्मकांड करने वाले कुछ हजार श्रद्धालु दिखाई पड़ते हैं। जो सायंकाल होते-होते लौट जाते हैं।