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मेले में मिली लुप्त होते स्थानीय उत्पादों को पहचान, खूब रही डिमांड

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कर्णप्रयाग। सोमवार को समाप्त हुए 67वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले में इस बार पहाड़ से लुप्त हो रहे उत्पादों की डिमांड खूब रही। मेले में दाल और सब्जी में तड़का लगाने वाले फरण को लोगों ने हाथों हाथ लिया। वहीं डुंग्री के आलू और दालों की भी डिमांड रही। स्थानीय अदरक और लहसुन की भी लोगों ने जमकर खरीदारी की।
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सात दिन तक चले मेले में लोगों ने स्थानीय उत्पादों को खरीदने में काफी उत्साह दिखा। पलायन से खाली होते गांवों मे भले ही अब खेती कम हो गई हो। लेकिन गौचर मेले के दौरान स्टॉलों में सजे झंगोरे के चावल, मंडुवे का आट, काले और सफेद भट, स्थानीय दालों को लोगों ने खूब लिया। यही नहीं जोशीमठ के नीति और माणा क्षेत्रों में होने वाले फरण की भी जबरदस्त डिमांड रही। थराली के सोलडुंग्री क्षेत्र से आए आलू ने अपनी विशेष पहचान बनाई। मेला में आलू को बेच रहे सोनू का कहना है कि गांवों में किसानों से बिचौलिए औन पौने दामों पर आलू खरीदते हैं जिससे किसानों को लाभ नहीं होता। सोनू ने बताया कि मेले के दौरान करीब 15 कुंतल से अधिक आलू बेच चुके हैं। जिससे सात दिनों में 20 हजार की आय हुई है।

मेला समाप्त होने के बाद भी रही भीड़
गौचर। मेला मैदान में मेला सोमवार को समाप्त होने के बाद भी मंगलवार को मैदान में मेले जैसे हालात रहे। यहां सजे बाजारों में खरीदारों की भीड़ लगी रही। इस दौरान लोगों ने शर्दियों के लिए गरम कपड़े सहित अन्य सामान खरीदने में रुचि दिखाई। मंगलवार को मेला मैदान में कर्णप्रयाग, सिमली, लंगासू, गौचर सहित आस पास के क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग पहुंचे थे।
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