अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों पर झोलाछाप डाक्टर भारी पड़ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की ओर से झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ अभियान नहीं चलाने से डाक्टरों के हौंसले बुलंद हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि झोलाछाप डाक्टरों को चिह्नित करने के लिए विभागीय स्तर पर हाल फिलहाल में कोई योजना भी नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से झोलाछाप डाक्टरों के खिलाफ अब तक जितने अभियान चलाए गए हैं वह सब कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। विभागीय अधिकारियों ने अपवादस्वरूप एकाध बार अभियान भी चलाया, कई डाक्टरों को नोटिस भी जारी किए। इसके बावजूद सभी झोलाछाप डाक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वह महज जांच की कार्रवाई कर सकते हैं। बाकी जांच की पूरी प्रक्रिया पुलिस या फिर प्रशासन की है। अधिकारियों का तर्क है कि उनके पास कोई अधिकार ही नहीं हैं।
झोलाछाप डाक्टरों के बारे में जानकारी ही नहीं
शहर के अलावा जिले के घाड़ और खादर क्षेत्र में कितने झोलाछाप डाक्टर्स हैं, इसकी कोई अधिकृत जानकारी विभागीय अफसरों के पास नहीं है। इन्हीं डाक्टरों की करतूतों के चलते कई मरीजों की जान तक चली गई। कई झोलाछाप डाक्टरों के क्लीनिक पर जमकर तोड़फोड़ की गई, जबकि कई के खिलाफ मुकदमें तक दर्ज कराए गए।
झोलाछाप डाक्टरों की जांच कराई जाएगी। जो भी डाक्टर अनाधिकृत तरीके से प्रैक्टिस करता पाया जाएगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। -दीपक रावत, डीएम
जिले में झोलाछाप डाक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं इसकी जानकारी है। सभी एसीएमओ और चिकित्सा प्रभारियों से उनके इलाके में सक्रिय झोलाछाप डाक्टरों के संबंध में जानकारियां मांगी गई है। जल्द ऐसे डाक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। मीजल्स रुबैला और इंद्रधनुष जैसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों के चलते अभी थोड़ी दिक्कत है।
..डा. अशोक कुमार गैरोला, सीएमओ