श्रीनगर। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले उक्रांद के पूर्व केंद्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष केएम बड़थ्वाल का उनके निवास भक्तियाना में निधन हो गया है। वह 85 वर्ष के थे। उनकी तीन बेटियां और दोे बेटे हैं। उनकी पत्नी गायत्री देवी का 5 साल पहले ही निधन हो चुका है। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा। बड़थ्वाल के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
बड़थ्वाल 11 साल से गले के कैंसर से पीड़ित थे। इसके बावजूद वह राज्य बनने के बाद भी समस्याओं को लेकर संघर्ष करते रहे। बड़थ्वाल का जन्म 1 फरवरी 1933 को पौड़ी जिले के ग्राम सिमड़ी लगा फरसैंगाल (पट्टी खाटली) में हुआ था। वह अपने पिता और ताऊ के साथ क्वेटा बलूचिस्तान (पाकिस्तान) चले गए। भारत-पाकिस्तान का विभाजन होने पर वह अपने पिता के साथ गांव लौट आए। आठ जून 1948 को बड़थ्वाल पीएसी में भर्ती हुए। डेपुटेशन पर एसएसबी (सेवा सुरक्षा बंधुत्व) में जाने के बाद एक सितंबर 1969 को वह एसएसबी में समायोजित हो गए। एक फरवरी 1988 को वह डिप्टी कमांडेंट पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद वह राज्य निर्माण आंदोलन में कूद गए। वर्ष 1991 में वह उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़ गए। चार साल तक वह दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान श्रीयंत्र टापू, खैट पर्वत, पौड़ी, श्रीनगर मुजफ्फरनगर, कीर्तिनगर जंतर-मंतर व रामपुर समेत अन्य स्थानो में नेतृत्व किया।
बड़थ्वाल के निधन पर जताया शोक
श्रीनगर। केएम बड़थ्वाल के निधन पर प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, झाबर सिंह रावत, देवेंद्र फर्स्वाण, हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी, जगदंबा रतूड़ी, केदार सिंह बिष्ट, प्रेमदत्त नौटियाल, सदानंद पुरी, जेपी पुरी, चंद्रमोहन बहुगुणा, आरएस शुक्ला, आरपी चमोली, जेपी पोखरियाल, विमला कोठियाल, लक्ष्मी गुप्ता, सरस्वती नौटियाल और शकुंतला ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।