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रूमा झूमा वाली संध्या झूलि गे.....पर झूमा गौचर क्षेत्र

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गौचर। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाड़ के नाम रही औद्योगिक विकास मेला गौचर की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या पर मेला मंच पर जागर, पांडवार्थ और सुदूर सीमा पर तैनात फौजी बेटे द्वारा अपनी मां को भेजे गए कुशल संदेश हम कुशल छवां हे मां दगड़ियों दगड़ि.. की शानदार प्रस्तुति छाई रही। अलकनंदा सांस्कृतिक विकास संस्था गौचर के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों और हास्य प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए काफी रोचक रही।
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मेला पांडाल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत शिक्षण संस्थाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। जिसके बाद अलकनंदा सांस्कृतिक विकास संस्था गौचर के कलाकारों ने धारी देवी का ऐजा मंदिर.. वंदना से माहौल भक्तिमय बना दिया। संस्था के कलाकार भानुराज, संजू बिष्ट, पूजा गोदियाल, आदि ने घुट घुट बाडुलि..., तेरी माया मां..., पल्या गौं का मोहना... की प्रस्तुति पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। सुरेश कुमार के संचालन में आयोजित हुई संस्था के कार्यक्रमों में जागर और झुमैला गीत जौ की हरियाली, मौ की पंचमी... काफी सराहनीय रही। सुप्रसिद्घ जागर सम्राट प्रीतम भरतवाड़ और सांस्कृतिक टीम ने जैसे ही मंच संभाला तो दर्शक दीर्घा तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठी। ढोल वादक विजेंद्र कुमार की तरंगित ढोल थाप पर रूमा झूमा वाली संध्या झूलि गे... वंदना से प्रीतम भरतवाड़ की स्टॉर नाइट शुरू हुई। और इसके बाद साथी कलाकार अनूप सेमलियाट, शैलेंद्र पटवाल, सूरज जोशी, शालिनी सुंदरियाल, शिल्पा, अरविंद आदि कलाकारों की टीम ने सरूलि मेरू जिया लगीगे..., बांद अमरावती..., पंडवार्थ गाकर हे पंडो जगनिंदा ह्वे जावा.. के साथ किलै रूसे होली मेरी सिलोरा... की भव्य प्रस्तुति पर दर्शक ठंड के बावजूद पांडाल के बाहर देर रात तक थिरकते रहे। कार्यक्रम का संचालन अर्जुन नेगी और रमेश सिदोला ने किया। एसडीएम केएन गोस्वामी, तहसीलदार विपिन चंद्र पंत, जयकृत बिष्ट, दलबीर कनवासी, नवीन टाकुली, गजेंद्र नयाल, राजेश्वरी नेगी, इंदू पंवार, राजेश सती, प्रमोद कांडपाल, सुुनील पंवार, सुभाष बहुगुणा, संजय सती, महाराज लिंगवाल आदि ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया।
जीआइसी गौचर बना सिरमौर
विभिन्न विद्यालयों की चल बैजयंती प्रतियोगिता में सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों में जीआईसी गौचर की टीम ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। जबकि राजकीय आदर्श बालिका इंटर कालेज गौचर द्वितीय, ब्रिटिश पब्लिक स्कूल गौचर तथा सीक्रेट हार्ट स्कूल घोलतीर तीसरे स्थान पर रहे। प्रदर्शनी कक्ष में सभी विभागीय स्टॉलों में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग प्रथम, कृषि एवं उद्यान विभाग द्वितीय तथा शिक्षा विभाग के सर्व शिक्षा अभियान के स्टॉल को तृतीय स्थान मिला। उद्योग के क्षेत्र में अंसार हथकरघा उद्योग प्रथम, मां हीरमणी शुद्घ हिमालयी उत्पाद और बबलू जैकब सेंटर तृतीय रहे। निजी क्षेत्र के स्टॉलों में मोहसिन पहले, बिष्ट फास्ट फूड दूसरे और हासम रशीद खुजा तीसरे स्थान पर रहे।
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अधिकारी नहीं दे पाए जवाब
मेले के दौरान आयोजित पत्रकार सम्मेलन में अध्यक्षता कर रहे प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी आनंद सिंह ने बाद में उपलब्ध कराने की बात कही। यही नहीं देवलकोट सड़क, गैरसैंण-फरकंडे सड़क सहित कई सड़कों के मामले में अधिकारियों ने गोल मोल जबाब दिए। पत्रकारों ने अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध करने की बात कही। जिस पर तीन माह बाद जिले के केंद्र बिंदु में पत्रकार सम्मेलन किए जाने का निर्णय लिया गया। वहीं महिला सशक्तीकरण गोष्ठी में महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा करते हुए प्रतिभागियों ने महिला पुरूष समानता बनाए रखने और उत्पीड़न के विरोध में एकजुट होकर पहल करने पर चर्चा की। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने कहा कि आयोग महिलाओं की हर एक शिकायत पर पूरी दृढ़ता से काम करेगा। कैंतुरा ने समाज में बेटी बेटे के बीच भेद भाव मिटाने की जरूरत पर बल दिया। गोष्ठी में जनप्रतिनिधियों ने सुझाव रखते हुए महिला उत्पीड़न संबंधी मामलों का निस्तारण समय पर किए जाने मांग की। गोष्ठी मे राजेश्वरी नेगी, रोशनी नेगी, इंदू पंवार, प्रमुख राधा देवी, रेनू नेगी, लक्ष्मी थपलियाल आदि मौजूद थे।
कविताओं में पलायन और बेकारी का दर्द उकेरा
मेला पांडाल में देर शाम आयोजित हुई कवि गोष्ठी में कवियों ने पहाड़ के पलायन, बेकारी और आधुनिक चकाचौंध में बदलते रीति रिवाजों पर तंज कसे। कवियों की मर्मस्पर्शी कविताओं में प्रवासी उत्तराखंडियों को अपने घर गांव लौटने के अपील और पहाड़ में शराब के बढ़ते कारोबार की चिंता भी की। कलश लोक संस्कृति चेरेटेबल ट्रस्ट रुद्रप्रयाग के सौजन्य से आयोजित हुई कवि गोष्ठी में उत्तरकाशी से पहुंचे प्रसिद्घ लोक गायक और रचनाकार ओम बधाणी ने ज्वानि को बसंत पैटण बैठिगे रचना से ढलती जवानी का मर्म सामने रखा। प्रख्यात कवि मुरली दीवान ने ठेका दीलि शराब दीलि, अब छिन ब्वना खराब दीलि.., तेजपाल निर्मोही ने मैन त सदनि रूप्या कमैनि.., जगदंबा चमोला ने सुभि पैटो रे होलु जैन नरेंद्र सिंह नेगी दीनि..., और विक्रम कप्रवाण ने बदलि मनखी बदलि जमानो, बदलि रीति रिवाज.. रचना से विलुप्त होते रीति रिवाजों को इंगित किया। गोष्ठी का संचालन करते हुए प्रवक्ता ओम प्रकाश सेमवाल ने कखि फैंकदो जाल दिदा, कखि मारदो माछा..., जयविशाल गढ़देशी ने माया को बुखार मैं से नि सकदु यार.., ललित गुसाईं ने छौंद खांद बैरी बड्यूं तेरी माया मां..., संगीता बहुगुणा ने दुनिया को सजालू मै.., ज्योत्सना जोशी ने सुणा दूं मेरा सदनि यनि दिन रैना.., ललित नौटियाल ने कंधे हमारे हैं, बंदूक उसने चलाई है.. और सुरेश आर्य ने नेता नगरी पर भाव पूर्ण प्रस्तुतियां दी।
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