अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पौराणिक धर्मस्थल बिल्वकेश्वर महादेव के प्रांगण में शिव महापुराण कथा सुनाते हुए पं. रामजी पांडे पौराणिक ने कहा कि भगवान शिव के अनेक स्वरूप हैं। उनका वर्णन श्यामल है, किंतु अनेक शास्त्रों ने श्वेत वर्ण वाले महादेव का भी वर्णन है। शिव का अपमान करने वाले को कभी चैन नहीं मिलता। शिव की आराधना ही करनी चाहिए।
कथा व्यास पौराणिक ने कहा कि श्वेत वर्ण वाले भगवान शिव के दस हाथ हैं। यह दस हाथ पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण आदि दस दिशाओं के रूप में विद्यमान हैं। इस रूप का ध्यान करने से दसों दिशाओं में रहने वाले जीवों की रक्षा हो जाती है। इसी प्रकार भगवान शिव के पांच मुख भी है। ये मुख सृष्टि, पालन, संहार, तिरोभाव एवं अनुग्रह के रूप में है। पंचमुखी शिव के प्रतीक मुख में तीन नेत्र हैं। ये नेत्र स्वर्ग, मृत्यु, पाताल, लोक, सज, रज, तम आदि तीनों मंडलों के स्वामी हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी शिव का अपमान किया है, वह धरती पर जीवित न रह पाया। शिव तो मूल तत्व हैं और अनादि देव है। दक्ष प्रजापति ने संसार के सभी देवताओं का सम्मान किया, किंतु महादेव का अपमान किया। फलस्वरूप उसे दंड भोगना पड़ा। वीरभद्र की रचना ही दुष्टों को दंडित करने को की गई। उन्होंने कहा कि केवल शिव ही ऐसे देवता हैं जिनका सम्मान देश के हर कोने में होता है। भगवान शिव की पूजा सर्वत्र की जाती है। शिवलिंग के रूप में महादेव अनेक देशों में आसीन हैं। शिव की आराधना गूढ़ मंत्रों से भी होती है और सरल भाव से भी। जो व्यक्ति मानस से भी शिव का ध्यान करता है उसके संकट दूर हो जाते हैं।