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पहाड़ी दालों के शौकीनो को इस वर्ष नहीं मिलेगा पहाड़ी दालों का स्वाद

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गोपेश्वर। चमोली जिले में करीब 70 फीसदी दलहन की फसलें बीमारी की चपेट में आने से काश्तकार परेशान हैं। काश्तकारों को दलहन उत्पादन में आई कमी से खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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जिले के उर्गम, निजमूला, सलूड़-डुंग्रा, मंडल घाटी, देवाल, थराली, नारायणबगड़ जैसे सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से तोर, गहत, उड़द, राजमा, सोयाबीन और सफेद व काले भट्ट का उत्पादन किया जाता है। इनसे ग्रामीण वर्षभर में अच्छी आमदनी अर्जित करते हैं, लेकिन इस वर्ष दलहन की फसल पर कटवर्म कीट लगने से फसल चौपट हो गई है। जुलाई और अगस्त माह में आशा के अनुरूप बारिश न होने से भी कीट का प्रकोप बढ़ गया। इस कारण स्वउत्पादित दालें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। मोहन सिंह नेगी, ईराणी गांव निवासी का कहना है कि राजमा की फसल में सितंबर माह में कीट लग गया, जिससे आधे से अधिक फसल बर्बाद हो गई है। चंद्रकला और विजय मलासी का कहना है कि बीते वर्षों तक क्षेत्र में तोर और उड़द की फसल बड़े पैमाने पर होती थी, लेकिन इस वर्ष उत्पादन आधे से भी कम हुआ है। वहीं अपर कृषि अधिकारी डा. जितेंद्र भास्कर ने कहा कि दलहन की फसल कटवर्म रोग की चपेट में आने से उत्पादन में करीब 70 फीसदी की कमी हुई है। काश्तकारों की ओर से नियमित रूप से फसल में दवा का छिड़काव करना चाहिए।
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