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कदम-कदम पर पौड़ छन तू हिटदी जा...

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श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शन में जहां अब तक लोकगायकों ने दर्शकों को झुमाया, वहीं अब कवियों ने अपने चुटकुलों से दर्शकों को गुदगुदाया। मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या में कवियों ने अपने हास्य-व्यंग्य के जरिए कभी लोगों को हंसी से लोटपोट किया तो कभी सामाजिक व्यवस्थाओं पर चोट कर सोचने पर भी मजबूर किया।
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जीआईएंडटीआई मैदान में रविवार रात आयोजित गढ़-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन का शुभारंभ एसएसबी केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के डीआईजी यूपी बलोदी ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत रुद्रप्रयाग के कवि-गायक विक्रम कप्रवाण की कविता ‘हे रात ठैरी जा मैं जोन देखी ल्यों’ से हुई। श्रीनगर के कवि संदीप रावत ने ‘कदम-कदम पर पौड़ छन तू हिटदी जा’, दिल्ली से आए जसपाल सिंह ने ‘पैसा दुनिया म सब कुछ नी च’ पोखरी के कवि मुरली दीवान ने ‘शून्य से क्या समझिन तुम’ पौड़ी के कवि वीरेंद्र पंवार ने ‘मेरा दगड़ी हिट नी सकणू मिन इन माया कू क्या कन’ बागेश्वर के कवि मोहन जोशी ने उत्तराखंड की भूमि पावन सुंदर सुकिल हिवाला, नारायणबगड़ के कवि डा. प्रीतम ‘अपच्छयाण ने आंखा लगी अर तुम देखीनी’ श्रीनगर की कवियत्री उमा घिल्डियाल ने ‘बेरोजगार सड़क्यूं पर घुमणा राला’ और कवि सम्मेलन के संयोजक देवेंद्र उनियाल ने कनु होंदी ब्वे कविता सुनाई। नैनीडांडा के कवि धमेंद्र नेगी ने ‘बालौं का बानी ब्वे सदनी ज्यू तै मरणी रांद’ कविता के माध्यम से मां का बच्चों के प्रति प्रेम को उजागर किया। जबकि नैनीताल के हेमंत बिष्ट ने पहाड़ के गांवों में घटने वाली घटना को किलै जाम है गे फिर रा भीड़ आज पगडंडी के माध्यम से प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन सभासद सुधांशु नौड़ियाल ने किया। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष बिपिन मैठाणी, पूर्व नपा अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी व महेश गिरि आदि मौजूद थे।
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पुलिस ने नशामुक्ति पर किया नाटक का प्रदर्शन
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले की चौथी संध्या में उत्तराखंड पुलिस की ओर से नशा मुक्ति पर नाटक प्रस्तुत किया गया। कथानक के अनुसार, गांव के कुछ नशेड़ी युवक एक मेधावी युवक को नशे की गर्त में डाल देते हैं। नशे की आदत से मजबूर युवक घर से चोरी करने लगता है। जब गांव का प्रधान उसके पिता को यह वाकया बताता है, तो उसके पिता विश्वास करने के बजाय उल्टे प्रधान को भला बुरा कह देता है। नशे की वजह से मेधावी युवक की जान चली जाती है।
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‘एक अकेली औरत’ नाट्य का मंचन
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी में बैकुंठ नाट्य महोत्सव शुरू हो गया है। इसमें प्रथम दिन ‘एक अकेली औरत’ नाटक का मंचन किया गया। इस सोलो नाटक में 40 मिनट तक अदाकारा सुरमई ने अकेली औरत की भावनाएं, स्वाभिमान, त्याग, तकलीफ और अकेली महिलाओं की समस्याओं का भावपूर्ण अभिनय किया।
नाटक की शुरुआत में पात्र सीमा सोचनीय मुद्रा में बैठे दिखाई देती है। अपने घर की दिनचर्या में व्यस्त सीमा यह सोचकर मायूस हो जाती है, कि वह घर में अकेली है। अगले ही पल वह सोचती है, कि वह अकेली नहीं है, बल्कि उसका भरा पूरा परिवार है, लेकिन कुछ देर बाद वह फिर अकेलापन महसूस करने लगती है। उसका पति दूर है। घर के अंदर देवर छेड़ता है, तो घर के बाहर पड़ोसी। परेशानी से विचलित होकर उसकी समझ में नहीं आता है कि वह क्या करें। अंत में वह पड़ोसी और देवर को गोली मार देती है। इसके बाद वह अपने पति को घर बुलाती है। पति के घर पहुंचने पर सीमा उसको भी गोली मार देती है। ध्वनि व संगीत में श्रुति व प्रकाश में योगेश ने योगदान दिया। महोत्सव का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी ने किया। इस मौके पर प्रभारी सुधांशु नौड़ियाल व सह प्रभारी हिमांशु नौडियाल आदि मौजूद थे।
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