अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
हरकी पैड़ी तथा अन्य प्रमुख घाटों की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा अपने ही कुछ पुरोहितों से सख्त नाराज है। ये पुरोहित हरकी पैड़ी अस्थि प्रवाह कराने के बजाय गंगा के दर्जन भर घाटों पर अवैध रूप से अस्थि प्रवाह करा रहे हैं। बार-बार दी गई चेतावनी के बावजूद अवैध काम में जुटे ये पुरोहित मानने को तैयार नहीं। अब गंगा सभा अपने गंगा सेवक दल का पुनर्गठन कर यह अवैध कार्य रोकेगी।
गौरतलब है कि हरिद्वार में हजारों तीर्थयात्री प्रतिदिन अपने पुरखों की अस्थियां बहाने के लिए आते हैं। प्राचीन काल से हरकी पैड़ी से सटा अस्थि प्रवाह घाट इसके लिए नियत किया गया है। नगर निगम ने भी यहां अस्थि प्रवाह कराने का बोर्ड लगाया है। इसके विपरीत अनेक तीर्थ पुरोहित धोखा देकर अन्य दर्जन भर घाटों पर अस्थियां प्रवाहित करा रहे हैं। इन घाटों में गऊ घाट, कुशा घाट, सुभाष घाट, रोडीबेलवाला घाट, बिरला घाट, सर्वानंद घाट, सिंहद्वार घाट, विश्वकर्मा घाट और गणेश घाट शामिल हैं। रोडवेज, रेलवे स्टेशन तथा सभी पार्किंग स्थलों से यात्रियों को धोखा देकर अन्य घाटों पर ले जाया जाता है। इन घाटों पर अस्थि प्रवाह कराकर उन से भारी रकम ऐंठ ली जाती है। पुरोहितों की आड़ में बिहार से हरिद्वार आकर अनेक पंडित भी इस काम में जुट गए हैं। जो यात्री हर की पैैडी पर अस्थि प्रवाह के बात करता है, तो उसे यह कहकर गुमराह किया जाता है कि हरकी पैडी पर अस्थि प्रवाह करने के लिए एनजीटी ने प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि कोई ऐसा आदेश किसी स्तर पर नहीं दिया गया है। हरकी पैडी पर दिन भर अस्थि प्रवाह जारी है।
गंगा सभा के महामंत्री राम कुमार मिश्रा ने बताया कि धोखाधड़ी का यह धंधा अब बढ़ता ही जा रहा है। गंगा सभा ने अपने पुरोहितों से अनेक बार कहा कि तीर्थ की मर्यादा न तोड़ें। पौराणिक काल से हर की पैडी पर अस्थि प्रवाह कराने का नियम धर्मशास्त्रों द्वारा बनाया गया है। यहीं वह स्थल है जहां अमृत कलश रखा गया था। उन्होंने बताया कि घाटों पर जाकर भी गंगा सभा द्वारा अस्थि प्रवाह करवाने वालों खदेड़ा गया। ऐसा ही कार्य जूना अखाड़े ने भी बिरला घाट पर कईं बार किया है। अवैध रूप से कार्य करने वाले मानते नहीं। अब गंगा सभा अपने गंगा सेवक दल को पुनर्जीवित कर घाट पर तैनात करेगी। अवैध अस्थि प्रवाह रोकने के लिए पुलिस की मदद भी ली जाएगी।