गैरसैंण। कृषि उद्यान एवं पर्यटन विकास मेले का तीसरा दिन महिला मंगल दलों और जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के नाम रहा। जागर सम्राट की रूमा झूमा वालि संध्या..., बंगला देश काला डांडा... सहित कई प्रस्तुतियों पर दर्शक थिरक उठे। इससे पूर्व महिला मंगल दलों ने भी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
सोमवार को मेला पांडाल में महिला मंगल दलों ने ग्रामीण और पारंपरिक वेशभूषा में सराहनीय प्रस्तुतियां दीं। महिला मंगल दल गैड़, धारगैड़, कोलियाणा, गडोली, विसरखेत, डुंग्री, प्यूंरा, छिमटा, मठकोट, सिराणा, बेड़ी आदि गांवों की महिलाओं ने चांछरी, झोड़ा, चौंफुला आदि की प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान मालसी और छिमटा की महिलाओं के बीच रस्साकसी प्रतियोगिता हुई, जिसका फाइनल मुकाबला मंगलवार को होगा। वहीं मेला समिति ने शनिवार और रविवार को हुए स्कूली कार्यक्रमों का परिणाम घोषित किया, जिसमें झांकी प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में जेएसएसएन प्रथम, जीआईसी द्वितीय और सरस्वती विद्या मंदिर तृतीय रहा। जूनियर वर्ग में बाल सदन प्रथम, जूनियर स्कूल सलियाणा द्वितीय और आदर्श पब्लिक स्कूल तृतीय स्थान पर रहे। वहीं प्राथमिक वर्ग में प्राइमरी स्कूल सलियाणा प्रथम, सरस्वती शिशु मंदिर गैरसैंण द्वितीय और राजकीय प्राइमरी स्कूल गैरसैंण तृतीय रहे। दूसरी ओर सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के लोक नृत्य सीनियर वर्ग में गुरुकुल विद्या निकेतन प्रथम, सरस्वती विद्या मंदिर द्वितीय और जीजीआईसी तीसरे स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग में न्यू होम पहले, बाल सदन दूसरे और सरस्वती विद्या मंदिर तीसरे स्थान पर रहे। प्राथमिक वर्ग में प्राइमरी स्कूल सारेंग्वाड़ प्रथम, सलियाणा द्वितीय और सरस्वती शिशु मंदिर दूसरे स्थान पर रहा।
कृषि विभाग का स्टॉल प्रथम
गैरसैंण। मेले में लगे विभिन्न सरकारी स्टॉलों में कृषि विभाग का स्टॉल पहले स्थान पर रहा। ग्राम्य विकास दूसरे और वन विभाग का स्टॉल तीसरे स्थान पर रहा। वहीं गैर सरकारी स्टॉलों में भुवनेश्वरी महिला आश्रम ने पहला, अन्नपूर्णा स्वयं सहायता समूह ने दूसरा और गैरसैंण फ्रेश मसालों ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। मेले में लगे स्वास्थ्य, समाज कल्याण सहित अन्य विभागों के स्टॉलों में तैनात कर्मियों ने लोगों को कई जानकारियां दीं।
गैर होयूं च गैरसैंण, गेरा पड्यूं चि गैरासैंण...
गैरसैंण। कृषि उद्यान एवं पर्यटन विकास मेले में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने गैरसैंण राजधानी के बारे में कविता के माध्यम से बताया। कलश संस्था की ओर से आयोजित सम्मेलन में कवि ओम प्रकाश सेमवाल ने गैर होयूं च गैरसैंण, गेरा पड्यूं चि गैरासैंण.., जगदंबा चमोला ने जखि देख तखि दनका दनकी..., तेजपाल निर्मोही ने न ते ह्वे बाबू कु..., सुधीर बर्तवाल ने मुखड़ि पर कैकी आज..., बृजेश रावत ने साड्यूं का ह्वेगी... सहित कई कविताओं की प्रस्तुति दी। साथ ही बदलती परंपराओं, वीरान होते गांवों और सरकारी व्यवस्थाओं पर भी तंज कसा। सम्मेलन में अरुण चमोली, मनमोहन भट्ट, रिजवान कोंसर, शशि देवली, सरोज लाल, महावीर सिंह बिष्ट, भगवती प्रसाद और दीपक नौटियाल ने भी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुरुषोत्तम असनोड़ा ने की।