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अवैध कब्जे हटाने पर आक्रोशित कर्मचारियों ने की तालाबंदी

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम परिसर से अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई को लेकर कर्मचारी भड़क गए हैं। आक्रोशित कर्मचारियों ने शनिवार को नगर निगम में तालाबंदी कर दी है। उन्होंने गैराज में भी ताला लगाकर कर कूड़ा गाड़ियों को नहीं निकलने दिया। इससे शहर की सफाई व्यवस्था पर असर पड़ा है। तालाबंदी की सूचना पर कर्मचारियों को शांत करने के लिए पहुंचे मेयर मनोज गर्ग और उनके सलाहकार सुभाष चंद का भी कर्मचारियों ने घेराव कर नारेबाजी की। महिला कर्मचारी काफी आक्रोश में थीं।
कर्मचारियों आरोप है कि अधिकारी अपने कर्मचारियों को तो बेघर कर रहे हैं, लेकिन जिन बड़े बाहरी लोगों व नेताओं ने अवैध कब्जे कर रखे हैं उनकी तरफ झांक भी नहीं रहे हैं। उनकी यह भी शिकायत थी कि उन्हें पहले सूचना भी नहीं दी गई। कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों को अवैध कब्जों पर किराये पर रखा हुआ था। यह बात भी शुक्रवार को ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान सामने आई। कर्मचारियों के विरोध के कारण शनिवार को कब्जों के विरुद्ध अभियान नहीं चल पाया है। तालाबंदी के बाद भी अपने कार्यालय केेे अंदर बैठने होने पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल भी कार्यालय छोड़ कर चले गए। नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया के कड़े रुख से कर्मचारी इतने घबराए हुए भी हैं कि विरोध में शामिल होने के बावजूद वह अपना नाम बताने को तैयार नहीं थे। कुछ बाहरी लोग ही बढ़चढ़ कर उनकी ओर से बात कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन व तालाबंदी कराने वालों में मोहित शर्मा, कान्हा पंवार, अनुज लखेड़ा, प्रवेश चमोली, शरद सैनी, देवेंद्र तिवारी, पुष्पा वाजपेयी, बिलकेश्वर, पूजा, विमला मालकोटी आदि शामिल थे।
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कर्मचारियों से वार्ता कर रास्ता निकाला जाएगा
मेयर मनोज गर्ग ने बताया कि कर्मचारियों की समस्या पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से उनकी बात हुई है। मंत्री ने कर्मचारियों के साथ वार्ता कर उनकी व्यवस्था करने को कहा है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस संबंध में वह लिखित में आदेश भी जारी करवाएंगे। मेयर ने बताया कि पांडेवाला ज्वालापुर में नगर निगम के पास बीएसयूपी के 16 आवास खाली हैं। मानवीय तथा पात्रता के आधार पर कर्मचारियों को आवास आवंटित कराया जाएगा। राजकुमार की बिल्डिंग तोड़ने का भी वे विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि उसने हाल ही नया निर्माण कराया था। उन्होंने बताया कि शासन व प्रशासन के साथ बैठकर कोई फार्मूला निकाला जाएगा। कर्मचारी पांडेवाला के आवासों को घटिया बताकर उन्हें लेने के लिए तैयार नहीं हैं। एक कर्मचारी का आरोप था कि उससे टिबड़ी जमीन खाली कराकर भाजपा का कब्जा करा दिया गया है। उसका कहना है वह जमीन का किराया भी नगर निगम को दे रहा था। एक कर्मचारी ने अपना घरेलू सामान चोरी होने की शिकायत भी की है।
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कब्जेदारों को हटाने में कोई ढिलाई नहीं
सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल ने कहा कि कार्यरत कर्मचारियों के आवासीय अतिक्रमण को फिलहाल रोक दिया गया है, लेकिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों की ओर से अवैध रूप से आवास पर काबिज होने पर बेदखली की कार्रवाई में ढिलाई नहीं होगी। गौरतलब है कि नगर निगम प्रशासन ने नगर निगम के पूरे परिसर को अवैध कब्जों से मुक्त करने का निर्णय लिया है। इस परिसर में एचआरडीए के साथ मिलकर बड़ी परियोजना पर काम किया जा रहा है। जिसके लिए सर्वे भी कराया गया जा चुुका है। जमीन के बदलने में एचआरडीए नगर निगम को बहुउद्देश्य मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का निर्माण तथा सभागार बनाकर देने पर विचार कर रहा है।
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