देवप्रयाग। राजकीय इंटर कॉलेज हिंडोलाखाल का नाम स्वतंत्रता सेनानी बचन सिंह चौहान राजकीय इंटर कॉलेज हो गया है। बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी ने नामकरण शिलापट्ट का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राष्ट्र की धरोहर हैं। भावी पीढ़ी को उनके योगदान व त्याग से प्रेरणा लेनी चाहिए। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख जयपाल सिंह पंवार, ज्योति कैंतुरा, खंड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार, जेपी चंद, प्रदीप रौथाण और प्रधानाचार्य डीपी भट्ट आदि मौजूद थे।
आजाद हिंद फौज में संभाली थी लांस नायक की जिम्मेदारी
देवप्रयाग। आजाद हिंद फौज के लांस नायक बचन सिंह चौहान का जन्म विकास खंड देवप्रयाग (हिंडोलाखाल) के डूंगी गांव में 21 सितंबर 1922 को हुआ था। 25 सितंबर 1940 को वह बतौर राइफलमैन ब्रिटिश इंडियन आर्मी की तीसरी बटालियन गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए। इस बीच द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया तो उन्हें मध्य पूर्व देश सूडान भेजा गया।
8 जून 1941 को वह युद्ध में बंदी बना लिए गए। तब यहां से किसी तरह निकलकर वे नेताजी सुभाष चंद्र के आह्वान पर जर्मनी में ही गठित आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। नेता जी ने उन्हें आजाद हिंद फौज की 950 वीं यूनिट में लांस नायक नियुक्त किया। 1942 से 1945 तक आजाद हिंद फौज में रहते हुए बचन सिंह देश की आजादी के लिए लड़ते रहे। इसी संघर्ष के दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें बंदी बनाकर जेल में डाल दिया। 15 फरवरी 1946 को देश के प्रमुख नेताओं की पैरवी पर बचन सिंह भी रिहा हो गए। देश की आजादी के बाद बचन सिंह पुन: गढ़वाल राइफल में भर्ती हो गए।
1951 में सेवानिवृत्त होने पर बचन सिंह मुंबई चले गए, जहां उन्होंने भारतीय ऑक्सीजन कंपनी में सुरक्षा अधिकारी पद पर काम किया। 1984 में अपने गांव डूंगी लौट कर वह समाज सेवा से जुड़ गए। उन्होंने जन आंदोलनों में प्रमुखता से भाग लिया। पहाड़ के विकास व बालिका शिक्षा के प्रबल समर्थक बचन सिंह ने अपनी पांचों पुत्रियों को शिक्षित करने में कोई कमी नहीं की। उनकी पुत्रियां सीमा नेगी, माया बिष्ट, उषा गुसांई, आशा रावत व निशा सभी शिक्षिकाएं हैं। एक फरवरी 2000 को उनको स्वर्गवास हो गया।