श्रीनगर। यूकेडी ने चेतावनी दी है कि यदि गरीबों को दिया जाने वाला सरकारी राशन बंद किया गया तो उक्रांद सड़कों पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध करेगी। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने कहा कि चुनाव से पहले किसानों के हितों की बात करने वाली पार्टी की सरकार के अब तक के कार्यकाल में छह किसान आत्महत्या कर चुके हैं। भट्ट ने किसानों की ओर से लिए गए ऋण पर ब्याज माफी और उनके खिलाफ जारी आरसी को निरस्त करने की मांग की है।
मंगलवार को उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने विभिन्न मुद्दों पर जीएमवीएन में पत्रकारों से वार्ता की। इस मौके पर भट्ट ने कहा कि डबल इंजन के बजाय तीन इंजन वाली सरकार आज तक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मध्य परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं कर पाई है। कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप कर परिसंपत्तियों को उत्तराखंड को सौंप देना चाहिए। भट्ट ने कहा कि भाजपा के पूर्व शासनकाल में जब उन्हें खाद्य मंत्री का दायित्व दिया गया था तब उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य था, जहां गरीब लोगों को दो व तीन रुपये किलो गेहूं और चावल मिलता था, किंतु अब सरकार की ओर से चीनी बंद करने के बाद सरकारी राशन को भी बंद किया जा रहा है। चेतावनी दी कि अगर राशन देना बंद किया गया तो उक्रांद उग्र आंदोलन शुरू करेगा। भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जो तीन हजार स्कूलों को बंद करने का बयान जारी किया है वह इस ओर संकेत करता है कि प्रदेश से बड़ी संख्या में गांवों से पलायन हो रहा है। कहा कि समूह ग की भर्ती के लिए स्नातक के साथ ही विषयों की अनिवार्यता यहां के बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ है। भट्ट ने कहा कि श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के कारण नंदी के पानी को रोक दिया गया है, जिससे किलकिलेश्वर शिव मंदिर में लोग गंदे नालों के पानी से जलाभिषेख करने को मजबूर है। साथ ही परियोजना संचालन कंपनी की ओर से प्रभावितों को रोजगार न दिए जाने व बकायों का भुगतान नही किया जा रहा है। भट्ट ने पंचायती राज एक्ट लागू न किए जाने व सरकार की ओर से गांवों को पालिका/ निकाय में जबरन शामिल किए जाने पर कड़ा आक्रोश जताया है। प्रदेश की राजधानी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी गैरसैंण में ही बननी चाहिए।