अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
महंत मोहनदास गुमशुदगी प्रकरण में संत समाज ने खामोशी ओढ़ ली है। सरकार और पुलिस के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे संत समाज की चुप्पी आश्चर्यजनक मानी जा रही है। दीपावली गुजरने पर संत समाज ने आगे की रणनीति तैयार करने का दावा किया था, लेकिन फिलहाल संत समाज में कोई हलचल नहीं दिख रही है।
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत मोहनदास की गुमशुदगी पहेली बनी हुई है। महंत के गायब होने पर संत समाज ने हो हल्ला किया था। सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने की धमकी तक दी थी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बड़ा अखाड़ा पहुंचने पर कई संतों ने संत समाज पर खतरा मंडराने तक की बात कही थी। सीएम के निर्देश पर एसआईटी बनी थी, वह भी महंत को नहीं खोज पाई। कई राज्य की दौड़ के बाद हांफ चुकी एसआईटी अब चुप बैठ गई है।
यहां तक एडीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार बोल चुके हैं कि महंत खुद ही अपनी इच्छा से गए है, अब तक की पड़ताल का यही निष्कर्ष है। इधर, संत समाज ने दीपावली गुजरने पर फिर से आंदोलन को लेकर रूपरेखा बनाने का दम भरा था। ये बात खुद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कही थी, जिनकी परिषद के प्रवक्ता गायब मोहनदास है। महंत को लेकर संत समाज कितना परेशान है, ये अब उनकी उदासीनता से दिख रहा है।